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shampa andaliib
jis subh naam aapka pad jaa.e kaan men
jis subh naam aapka pad jaa.e kaan men | जिस सुब्ह नाम आपका पड़ जाए कान में
- shampa andaliib
जिस
सुब्ह
नाम
आपका
पड़
जाए
कान
में
बाद-ए-सबा
भी
खेलती
है
बालियों
के
साथ
- shampa andaliib
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कितनी
मुश्किल
के
बाद
टूटा
है
एक
रिश्ता
कभी
जो
था
ही
नहीं
Shahbaz Rizvi
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बे-सबब
मरने
से
अच्छा
है
कि
हो
कोई
सबब
दोस्तों
सिगरेट
पियो
मय-ख़्वारियाँ
करते
रहो
Ameer Imam
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शर्तें
लगाई
जाती
नहीं
दोस्ती
के
साथ
कीजे
मुझे
क़ुबूल
मिरी
हर
कमी
के
साथ
Waseem Barelvi
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बदले
मौसम
हालात
यहाँ
है
ख़ुशियों
की
बारात
यहाँ
होली
खेलेंगे
हम
भी
पर
खेलेंगे
तेरे
साथ
यहाँ
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Kaviraj " Madhukar"
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ये
ज़ुल्फ़
अगर
खुल
के
बिखर
जाए
तो
अच्छा
इस
रात
की
तक़दीर
सँवर
जाए
तो
अच्छा
जिस
तरह
से
थोड़ी
सी
तेरे
साथ
कटी
है
बाक़ी
भी
उसी
तरह
गुज़र
जाए
तो
अच्छा
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Sahir Ludhianvi
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बारिशें
जाड़े
की
और
तन्हा
बहुत
मेरा
किसान
जिस्म
और
इकलौता
कंबल
भीगता
है
साथ-साथ
Parveen Shakir
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तुम्हें
ज़रूर
कोई
चाहतों
से
देखेगा
मगर
वो
आँखें
हमारी
कहाँ
से
लाएगा
तुम्हारे
साथ
ये
मौसम
फ़रिश्तों
जैसा
है
तुम्हारे
बा'द
ये
मौसम
बहुत
सताएगा
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Bashir Badr
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मैं
जंगलों
की
तरफ़
चल
पड़ा
हूँ
छोड़
के
घर
ये
क्या
कि
घर
की
उदासी
भी
साथ
हो
गई
है
Tehzeeb Hafi
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फिरता
है
कैसे-कैसे
सवालों
के
साथ
वो
उस
आदमी
की
जामातलाशी
तो
लीजिए
Dushyant Kumar
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ये
मैंने
कब
कहा
कि
मेरे
हक़
में
फ़ैसला
करे
अगर
वो
मुझ
से
ख़ुश
नहीं
है
तो
मुझे
जुदा
करे
मैं
उसके
साथ
जिस
तरह
गुज़ारता
हूँ
ज़िंदगी
उसे
तो
चाहिए
कि
मेरा
शुक्रिया
अदा
करे
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Tehzeeb Hafi
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साँसें
दो
चार
रह
गईं
लेकिन
ख़त
तुम्हारा
अभी
नहीं
आया
shampa andaliib
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दिल
का
कमरा
ख़ाली
ख़ाली
लूट
लिया
आँखों
ने
तेरी
रोज़
उदासी
अक्सर
मैं
ने
तेरी
तस्वीरों
में
देखी
दुनिया
कितनी
पेचीदा
है
कोई
राह
तो
तुझ
तक
जाती
आँखों
में
तूफ़ान
उठा
कर
डूब
रहीं
हूँ
बैठी
बैठी
दुनिया
आड़े
आई
जब
जब
कोशिश
की
तुझ
तक
आने
की
क़िस्मत
है
ये
वर्ना
कैसे
तेरे
आगे
चलती
मेरी
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shampa andaliib
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फूल
इक
भी
नहीं
है
श्रद्धा
का
कैसे
मंदिर
का
तू
पुजारी
है
shampa andaliib
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सब
तीरगी
में
गुम
हैं
कहीं
रौशनी
नहीं
हर
शख़्स
ग़मज़दा
है
किसी
को
ख़ुशी
नहीं
shampa andaliib
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लोगों
की
बदनज़र
है
जिगर
में
तमाम
ग़म
क्या
सोच
कर
ख़ुदा
ने
बनाए
हसीन
लोग
shampa andaliib
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