zahar-e-gham khoob piya ham ne sharaabon se bache | ज़हर-ए-ग़म ख़ूब पिया हम ने शराबों से बचे

  - Shakeel Gwaliari
ज़हर-ए-ग़मख़ूबपियाहमनेशराबोंसेबचे
झेलकरकितनेअज़ाबोंकोअज़ाबोंसेबचे
सोचनेबैठेंतोसोचेहीचलेजातेहैं
ख़ौफ़काँटोंकाअजबथाकिगुलाबोंसेबचे
कितनेमा'सूमथेचेहरेनहींदेखेतुमने
वोजोरहकरभीनक़ाबोंमेंनक़ाबोंसेबचे
जागताहोतोदेखेकोईमहलोंकीतरफ़
किसतरहसोयाहुआआदमीख़्वाबोंसेबचे
इसहिकायतमेंकोईझूटकरदेशामिल
इसमेंसच्चाईअगरहैतोकिताबोंसेबचे
काशउलटदेकोईसहरामेंसमुंदरलाकर
क़ाफ़िलाडूबहीजाएतोसराबोंसेबचे
  - Shakeel Gwaliari
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