khizaan ke chaand ne poocha ye jhuk ke khidki men | ख़िज़ाँ के चाँद ने पूछा ये झुक के खिड़की में

  - Shakeb Jalali
ख़िज़ाँकेचाँदनेपूछायेझुककेखिड़कीमें
कभीचराग़भीजलताहैइसहवेलीमें
येआदमीहैंकिसाएहैंआदमिय्यतके
गुज़रहुआहैमिराकिसउजाड़बस्तीमें
झुकीचटानफिसलतीगिरफ़्तझूलताजिस्म
मैंअबगिराहीगिरातंग-ओ-तारघाटीमें
ज़मानेभरसेनिरालीहैआपकीमंतिक़
नदीकोपारकियाकिसनेउल्टीकश्तीमें
जलाएक्यूँँअगरइतनेहीक़ीमतीथेख़ुतूत
कुरेदतेहोअबसराखअबअँगेठीमें
अजबनहींजोउगेंयाँदरख़्तपानीके
किअश्कबोएहैंशबभरकिसीनेधरतीमें
मिरीगिरफ़्तमेंकरनिकलगईतितली
परोंकेरंगमगररहगएहैंमुट्ठीमें
चलोगेसाथमिरेआगहीकीसरहदतक
येरहगुज़ारउतरतीहैगहरेपानीमें
मैंअपनीबे-ख़बरीसे'शकेब'वाक़िफ़हूँ
बताओपेचहैंकितनेतुम्हारीपगड़ीमें
  - Shakeb Jalali
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