aaya hai har chadhaai ke ba'ad ik utaar bhi | आया है हर चढ़ाई के बा'द इक उतार भी

  - Shakeb Jalali
आयाहैहरचढ़ाईकेबा'दइकउतारभी
पस्तीसेहम-कनारमिलेकोहसारभी
आख़िरकोथककेबैठगईइकमक़ामपर
कुछदूरमेरेसाथचलीरहगुज़ारभी
दिलक्यूँँधड़कनेलगताहैउभरेजोकोईचाप
अबतोनहींकिसीकामुझेइंतिज़ारभी
जबभीसुकूत-ए-शाममेंआयातिराख़याल
कुछदेरकोठहरसागयाआबशारभी
कुछहोगयाहैधूपसेख़ाकिस्तरीबदन
कुछजमगयाहैराहकामुझपरग़ुबारभी
इसफ़ासलोंकेदश्तमेंरहबरवहीबने
जिसकीनिगाहदेखलेसदियोंकेपारभी
दोस्तपहलेक़ुर्बकानश्शाअजीबथा
मैंसुनसकाअपनेबदनकीपुकारभी
रस्ताभीवापसीकाकहींबनमेंखोगया
ओझलहुईनिगाहसेहिरनोंकीडारभी
क्यूँँरोरहेहोराहकेअंधेचराग़को
क्याबुझगयाहवासेलहूकाशरारभी
कुछअक़्लभीहैबाइस-ए-तौक़ीर'शकेब'
कुछगएहैंबालोंमेंचाँदीकेतारभी
  - Shakeb Jalali
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