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Shahanwaz Ansari
yuñ tujhe saamne apne main bithaaya karta
yuñ tujhe saamne apne main bithaaya karta | यूँँ तुझे सामने अपने मैं बिठाया करता
- Shahanwaz Ansari
यूँँ
तुझे
सामने
अपने
मैं
बिठाया
करता
तू
मुझे
देखती
मैं
तुझको
निहारा
करता
देख
कर
मुझको
निगाहें
तू
चुराया
करती
अपनी
आँखों
से
तुझे
मैं
भी
इशारा
करता
तू
मिरे
शानों
पे
सर
रख
के
यूँँ
सोया
करती
मैं
तिरे
ख़ुशबू
को
साँसों
में
समाया
करता
देर
तक
हम
भी
जो
इक
दूजे
से
करते
बातें
मैं
तुझे
अपनी
ग़ज़ल
पहले
सुनाया
करता
- Shahanwaz Ansari
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है
क्या
ज़रूरी
मिरा
ऐसा
करना
सब
भूल
कर
बस
तुझे
सोचा
करना
Shahanwaz Ansari
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तू
जो
अगर
हमारा
होता
सब
कुछ
कितना
प्यारा
होता
तुझ
सेे
न
हम
लगाते
दिल
को
न
ग़म
ने
हमको
मारा
होता
क्यूँ
रोते
हो
उसके
ख़ातिर
क्या
वो
कभी
तुम्हारा
होता
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Shahanwaz Ansari
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है
क्या
ज़रूरी
मिरा
ऐसा
करना
सब
भूल
कर
बस
तुझे
सोचा
करना
आग़ोश
में
अपनी
तुम
मुझको
लेना
हम
गर
मिले
यार
बस
इतना
करना
दिल
पर
मिरे
ज़ख़्म
सा
करता
है
ये
मुझ
से
नज़र
तुम
नहीं
फेरा
करना
ख़ुद
को
ये
कहना
कि
तुझको
न
सोचें
हर
वक़्त
फिर
तुझको
ही
सोचा
करना
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Shahanwaz Ansari
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उन
को
ही
अपने
दिल
में
बसाए
हुए
हैं
जिनकी
आँखों
के
हम
ठुकराए
हुए
हैं
तू
नज़र
तो
डाल
कभी
उन
पर
भी
सितमगर
वो
तग़ाफ़ुल
से
जो
लोग
सताए
हुए
हैं
अब
ऐसे
ही
कटती
है
हयात
ये
अपनी
आँखों
में
तेरे
ख़्वाब
सजाए
हुए
हैं
दिखते
हैं
सितारों
के
जैसे
ये
ज़मीं
पर
जो
दिए
तेरे
हाथों
के
जलाए
हुए
हैं
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Shahanwaz Ansari
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तुझ
को
अपने
लिए
ज़रूरी
लिक्खूँगा
मैं
बिन
तेरे
ज़िंदगी
अधूरी
लिक्खूँगा
मैं
Shahanwaz Ansari
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