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Shahanwaz Ansari
hai kya zaroori mira aisa karna
hai kya zaroori mira aisa karna | है क्या ज़रूरी मिरा ऐसा करना
- Shahanwaz Ansari
है
क्या
ज़रूरी
मिरा
ऐसा
करना
सब
भूल
कर
बस
तुझे
सोचा
करना
आग़ोश
में
अपनी
तुम
मुझको
लेना
हम
गर
मिले
यार
बस
इतना
करना
दिल
पर
मिरे
ज़ख़्म
सा
करता
है
ये
मुझ
से
नज़र
तुम
नहीं
फेरा
करना
ख़ुद
को
ये
कहना
कि
तुझको
न
सोचें
हर
वक़्त
फिर
तुझको
ही
सोचा
करना
- Shahanwaz Ansari
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मुझ
सेे
तू
गर
जुदा
नहीं
होता
हाल
इतना
बुरा
नहीं
होता
याद
में
तेरी
मैं
यूँॅं
खोता
हूॅं
मुझको
अपना
पता
नहीं
होता
इश्क़
को
लोगों
ने
ख़राब
किया
इश्क़
करना
बुरा
नहीं
होता
तुम
अगर
मेरे
हो
गए
होते
तो
मेरे
पास
क्या
नहीं
होता
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Shahanwaz Ansari
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तू
जो
अगर
हमारा
होता
सब
कुछ
कितना
प्यारा
होता
तुझ
सेे
न
हम
लगाते
दिल
को
न
ग़म
ने
हमको
मारा
होता
क्यूँ
रोते
हो
उसके
ख़ातिर
क्या
वो
कभी
तुम्हारा
होता
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Shahanwaz Ansari
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हो
रही
है
ख़ुशी
ये
बताते
हुए
वक़्त
कितना
हुआ
अब
छुपाते
हुए
जिस
भी
शब
ख़्वाब
में
मैंने
देखा
तुझे
सुब्ह
आँखें
खुली
मुस्कुराते
हुए
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Shahanwaz Ansari
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इक
तू
ही
वजह
है
हम
जो
नहीं
हिजरत
करते
ये
बहाना
है
कि
गुज़ारा
यहाँ
बचपन
अपना
Shahanwaz Ansari
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तुझ
को
अपने
लिए
ज़रूरी
लिक्खूँगा
मैं
बिन
तेरे
ज़िंदगी
अधूरी
लिक्खूँगा
मैं
Shahanwaz Ansari
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