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Shahanwaz Ansari
un ko hi apne dil men basaaye hue hain
un ko hi apne dil men basaaye hue hain | उन को ही अपने दिल में बसाए हुए हैं
- Shahanwaz Ansari
उन
को
ही
अपने
दिल
में
बसाए
हुए
हैं
जिनकी
आँखों
के
हम
ठुकराए
हुए
हैं
तू
नज़र
तो
डाल
कभी
उन
पर
भी
सितमगर
वो
तग़ाफ़ुल
से
जो
लोग
सताए
हुए
हैं
अब
ऐसे
ही
कटती
है
हयात
ये
अपनी
आँखों
में
तेरे
ख़्वाब
सजाए
हुए
हैं
दिखते
हैं
सितारों
के
जैसे
ये
ज़मीं
पर
जो
दिए
तेरे
हाथों
के
जलाए
हुए
हैं
- Shahanwaz Ansari
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वो
बस
तेरी
उम्मीद
लगा
कर
बैठे
हैं
तू
पूछ
लिया
कर
हाल
कभी
दीवानों
से
Shahanwaz Ansari
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कौन
किसी
का
सुनता
दुख
है
सबको
अपना
अपना
दुख
है
प्यार
मोहब्बत
घर
की
उलझन
सबको
वही
पुराना
दुख
है
तुझ
सेे
जुदा
हो
कर
ही
समझा
आख़िर
कैसा
होता
दुख
है
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Shahanwaz Ansari
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तिरे
दुखों
को
लादे
हुआ
हूँ
मैं
हयात
बस
यूँँ
ही
काटता
हूँ
मैं
उदासी
मुझ
में
कोई
नई
नहीं
उदासियों
का
घर
हो
गया
हूँ
मैं
करूँँ
मैं
क्या
जो
हूँ
दूर
दुनिया
से
सज़ा
मोहब्बत
की
काटता
हूँ
मैं
ये
सोच
कर
ही
उम्मीद
में
हूँ
बस
कभी
तो
तू
बोलेगा
तेरा
हूँ
मैं
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Shahanwaz Ansari
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यूँँ
मयकशी
तो
लगती
ख़राब
है
पिलाओ
तुम
तो
शरबत
शराब
है
तू
ज़िंदगी
में
है
फिर
तो
सब
हसीं
भला
तिरे
होते
क्या
ख़राब
है
तुम्हारे
होने
से
ही
है
ज़िन्दगी
तुम्हारे
बिन
जीना
तो
अज़ाब
है
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Shahanwaz Ansari
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मुझ
सेे
तू
गर
जुदा
नहीं
होता
हाल
इतना
बुरा
नहीं
होता
याद
में
तेरी
मैं
यूँॅं
खोता
हूॅं
मुझको
अपना
पता
नहीं
होता
इश्क़
को
लोगों
ने
ख़राब
किया
इश्क़
करना
बुरा
नहीं
होता
तुम
अगर
मेरे
हो
गए
होते
तो
मेरे
पास
क्या
नहीं
होता
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Shahanwaz Ansari
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