bujhe ehsaas ka pahluu ubhaaregi | बुझे एहसास का पहलू उभारेगी

  - Adnan Ali SHAGAF
बुझेएहसासकापहलूउभारेगी
वोजबआवाज़सेमुझकोपुकारेगी
खुलीजुल्फ़ें,झुकीपलकें,क़यामतचाल
जानेयेअदाअबकिसकोमारेगी
मेरेहोंठोंपेरखकेअपनेहोंठोंको
मेरीहरसाँसमेंख़ुशबूउतारेगी
फ़लककेकुलमकींउसकोहीदेखेंगे
अभीवोबामपरजुल्फ़ेंसँवारेगी
ख़ुदाउसशख़्सकीआँखेंबुझाडाले
वोजिसकेसामनेकपड़ेउतारेगी
भलेजितनाहीकुछकरलोमगरयेदिल
इकऐसीशयहैजोहरवक़्तहारेगी
  - Adnan Ali SHAGAF
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