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SWAPNIL YADAV 'NIL'
isko ik duniya ke jaisi karne hai
isko ik duniya ke jaisi karne hai | इसको इक दुनिया के जैसी करनी है
- SWAPNIL YADAV 'NIL'
इसको
इक
दुनिया
के
जैसी
करनी
है
सब
सेे
पहले
दुनिया
मिट्टी
करनी
है
सुनो
परिंदों
शाम
हुई
है
उड़
जाओ
मुझको
घर
में
दीया
बत्ती
करनी
है
तुझको
भी
रिन्दों
के
दर्द
समझने
हैं
तुझको
भी
क्या
मुझ
सेे
शादी
करनी
है
दिल
जलता
है
यार
हमारा
छोड़
मगर
आग
जली
है
सिगरेट-नोशी
करनी
है
- SWAPNIL YADAV 'NIL'
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लो
आज
हमने
तोड़
दिया
रिश्ता-ए-उम्मीद
लो
अब
कभी
गिला
न
करेंगे
किसी
से
हम
Sahir Ludhianvi
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कोई
ख़ुद-कुशी
की
तरफ़
चल
दिया
उदासी
की
मेहनत
ठिकाने
लगी
Adil Mansuri
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बीस
बरस
से
इक
तारे
पर
मन
की
जोत
जगाता
हूँ
दीवाली
की
रात
को
तू
भी
कोई
दिया
जलाया
कर
Majid Ul Baqri
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मक़तल-ए-शौक़
के
आदाब
निराले
हैं
बहुत
दिल
भी
क़ातिल
को
दिया
करते
हैं
सर
से
पहले
Ali Sardar Jafri
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बस
मैं
मायूस
होने
वाला
था
और
मौला
ने
तुझ
को
भेज
दिया
Zubair Ali Tabish
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ये
वो
क़बीला
है
जो
हुस्न
को
ख़ुदा
माने
यहाँ
पे
कौन
तेरी
बात
का
बुरा
माने
इशारा
कर
दिया
है
आपकी
तरफ़
मैंने
ये
बच्चे
पूछ
रहे
थे
कि
बे-वफ़ा
माने
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Kushal Dauneria
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मेहनत
तो
करता
हूँ
फिर
भी
घर
ख़ाली
है
बाबूजी
मिट्टी
के
कुछ
दीपक
ले
लो
दीवाली
है
बाबूजी
मिट्टी
बेच
रहा
हूँ
जिस
में
कोई
जाल
फ़रेब
नहीं
सोना
चाँदी
दूध
मिठाई
सब
जा'ली
है
बाबूजी
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Gyan Prakash Akul
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एक
परिन्दे
का
घर
उजाड़
दिया
किसी
ने
बस
बच्चों
के
इक
दिन
के
झूले
की
ख़ातिर
Pankaj murenvi
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धूप
के
एक
ही
मौसम
ने
जिन्हें
तोड़
दिया
इतने
नाज़ुक
भी
ये
रिश्ते
न
बनाये
होते
Waseem Barelvi
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बिठा
दिया
है
सिपाही
के
दिल
में
डर
उसने
तलाशी
दी
है
दुपट्टा
उतार
कर
उसने
मैं
इसलिए
भी
उसे
ख़ुद-कुशी
से
रोकता
हूँ
लिखा
हुआ
है
मेरा
नाम
जिस्म
पर
उसने
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Zia Mazkoor
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ये
कभी
मुख़्तसर
नहीं
आती
ज़िन्दगी
पर
नज़र
नहीं
आती
आपके
याँ
ही
मौत
मुर्दों
को
आती
होगी
इधर
नहीं
आती
ग़म
यही
है
कि
आह
अब
मेरे
जिस्म
को
चीर
कर
नहीं
आती
मौत
भी
दिल
दुखायगी
मेरा
मौत
भी
वक़्त
पर
नहीं
आती
तब
मुझे
चैन
ही
नहीं
पड़ता
तीरगी
जब
नज़र
नहीं
आती
वो
कोई
रेल
है
कि
रौनक
है
गुम
है,
मेरे
शहर
नहीं
आती
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SWAPNIL YADAV 'NIL'
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है
आना
गर
हमारी
ज़िंदगी
में
हमें
समझा
करेगा
ख़ामुशी
में
कहानीकार
को
समझा
रहा
हूँ
कोई
किरदार
मारो
आख़िरी
में
करोगे
क्या
अगर
जो
लौट
आया
वो
भूला
नाम
फिर
से
बन्दगी
में
मैं
दुनिया
जीतना
तो
चाहता
हूँ
और
उसको
भी
जो
है
रहता
इसी
में
वफ़ा
के
पैरहन
को
ओढ़
करके
बदन
रौशन
हुए
दो
तीरगी
में
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SWAPNIL YADAV 'NIL'
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न
लौटोगे
कभी
तुम
जानता
हूँ
ये
मेरी
ज़िंदगी
है
फ़िल्म
थोड़ी
SWAPNIL YADAV 'NIL'
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सरहदे-मौत
पर
भी
मिली
ही
नहीं
है
कि
हिस्से
मेरे
ज़िन्दगी
ही
नहीं
ख़ामुशी
है
उदासी
व
अफ़सुर्दगी
शामिले-जश्न
है
ख़ुद-कुशी
ही
नहीं
एक
लड़की
कि
जिसका
दिखा
अक़्स
था
चौक
पर
ही
वो
थी
और
थी
ही
नहीं
माँगती
और
बोसा
है
तिश्ना
जबीं
अज़्ल
की
आग
है
ये
बुझी
ही
नहीं
जाएँ
रोने
कहाँ
ऐ
ख़ुदा
तू
बता
है
कि
दुनिया
में
अब
तीरगी
ही
नहीं
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SWAPNIL YADAV 'NIL'
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कोई
छोड़
के
जाए
तो
हैरत
कैसी
ख़ुदस
समझौता
क्या
पहली
बार
किया
SWAPNIL YADAV 'NIL'
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