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Shaad Imran
ik teri KHaamushi se dartaa hooñ
ik teri KHaamushi se dartaa hooñ | इक तेरी ख़ामुशी से डरता हूँ
- Shaad Imran
इक
तेरी
ख़ामुशी
से
डरता
हूँ
वरना
मैं
कब
किसी
से
डरता
हूँ
पंखा
आवाज़
देने
लगता
है
जब
भी
मैं
ज़िन्दगी
से
डरता
हूँ
अब
तो
बर्बाद
कर
लिया
ख़ुद
को
अब
नहीं
शा'इरी
से
डरता
हूँ
था
जो
फ़रहाद,
मेरा
अपना
था
इसलिए
आशिक़ी
से
डरता
हूँ
वो
किसी
और
को
न
हाँ
कह
दे
उसकी
सादा-दिली
से
डरता
हूँ
बाग़
से
फूल
तोड़
लूँ
लेकिन
तितलियों
की
कमी
से
डरता
हूँ
काट
डाले
न
शाह
हाथ
मेरे
अपनी
कारीगरी
से
डरता
हूँ
तूने
छोड़ा
तो
बन
गया
क़ाबिल
अब
तेरी
वापसी
से
डरता
हूँ
जानता
हूँ
तुम्हारे
बाप
को
भी
मैं
मगर
एक
ही
से
डरता
हूँ
सुन
के
हैरत
हुई
कि
मुझ
से
ख़ुदा
कहता
है
आदमी
से
डरता
हूँ
- Shaad Imran
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मच्छरदानी
ऑलआउट
पे
पैसे
क्यूँ
बर्बाद
करूँँ
ख़ून
तो
उसने
चूस
लिया
है
मच्छर
से
अब
डरना
क्यूँँ
SHIV SAFAR
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बहुत
बर्बाद
हैं
लेकिन
सदा-ए-इंक़लाब
आए
वहीं
से
वो
पुकार
उठेगा
जो
ज़र्रा
जहाँ
होगा
Ali Sardar Jafri
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बर्बाद
कर
दिया
हमें
परदेस
ने
मगर
माँ
सब
से
कह
रही
है
कि
बेटा
मज़े
में
है
Munawwar Rana
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भुला
पाना
बहुत
मुश्किल
है
सब
कुछ
याद
रहता
है
मोहब्बत
करने
वाला
इस
लिए
बर्बाद
रहता
है
Munawwar Rana
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न
सहम
कर
न
डर
के
छोड़ता
है
हंस
तालाब
मर
के
छोड़ता
है
वक़्त
बर्बाद
करने
वालों
को
वक़्त,
बर्बाद
कर
के
छोड़ता
है
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Harman Dinesh
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न
पूछो
मुझ
से
लज़्ज़त
ख़ानमाँ-बर्बाद
रहने
की
नशेमन
सैकड़ों
मैं
ने
बना
कर
फूँक
डाले
हैं
Allama Iqbal
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जँचने
लगा
है
दर्द
मुझे
आपका
दिया
बर्बाद
करने
वाले
ने
ही
आसरा
दिया
कल
पहली
बार
लड़ने
की
हिम्मत
नहीं
हुई
मुझको
किसी
के
प्यार
ने
बुजदिल
बना
दिया
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Kushal Dauneria
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अब
क्या
ही
ग़म
मनाएँ
कि
क्या
क्या
हुआ
मियाँ
बर्बाद
होना
ही
था
सो
बर्बाद
हो
गए
shaan manral
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मुझ
को
तो
होश
नहीं
तुम
को
ख़बर
हो
शायद
लोग
कहते
हैं
कि
तुम
ने
मुझे
बर्बाद
किया
Josh Malihabadi
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बर्बाद
गुलिस्ताँ
करने
को
बस
एक
ही
उल्लू
काफ़ी
था
हर
शाख़
पे
उल्लू
बैठा
है
अंजाम-ए-गुलिस्ताँ
क्या
होगा
Shauq Bahraichi
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ऐसा
नहीं
कि
मैंने
मोहब्बत
नहीं
करी
इज़हार
करने
ही
कि
बस
हिम्मत
नहीं
करी
Shaad Imran
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एक
ही
धोका
तो
दो
बार
नहीं
खाऊँगा
खा
तो
सकता
हूँ
मगर
यार
नहीं
खाऊँगा
इश्क़
दोनों
ने
किया
दोनों
को
पत्थर
मारो
मैं
अकेला
तो
मियाँ
मार
नहीं
खाऊँगा
काम
का
दुख
हूँ
मैं
सो
ऐ
मेरे
दफ़्तर
वाले
कैसे
कह
दूँ
तेरा
इतवार
नहीं
खाऊँगा
जुर्म
मेरा
भी
वही
है
कि
मैं
सच
बोलता
हूँ
ज़हर
लेकिन
मेरे
सरकार
नहीं
खाऊँगा
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Shaad Imran
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मैं
अपने
आप
से
तंग
आ
चुका
हूॅं
कहीं
मरवा
न
दूँ
ख़ुद
को
किसी
से
Shaad Imran
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आजकल
हम
जफ़ा
पे
लिखते
हैं
यानी
तेरी
अदा
पे
लिखते
हैं
Shaad Imran
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तुमने
बस
बाज़ार
में
जल्वे
देखे
हैं
हमने
भीड़
में
खोते
बच्चे
देखे
हैं
इन
आँखों
से
दरिया
फूटना
लाज़िम
था
इन
आँखों
ने
मंज़र
ऐसे
देखे
हैं
औरों
ने
दौलत
शोहरत
भी
चाही
है
हमने
तो
बस
उसके
सपने
देखे
हैं
उसकी
ख़ातिर
जंग
नहीं
देखी,
लेकिन
कालेज
में
सब
लड़के
लड़ते
देखे
हैं
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Shaad Imran
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