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Sarvjeet Singh
kya darein ham bhoot-daayan-si kisi bhi bad-bala se
kya darein ham bhoot-daayan-si kisi bhi bad-bala se | क्या डरें हम भूत-डायन-सी किसी भी बद-बला से
- Sarvjeet Singh
क्या
डरें
हम
भूत-डायन-सी
किसी
भी
बद-बला
से
आदमी
से
ही
नहीं
महफ़ूज़
है
जब
आदमी
अब
- Sarvjeet Singh
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उसके
अच्छे
शे'र
नहीं
भाते
हमको
जो
अच्छा
इंसान
नहीं
बन
पाता
है
Tanoj Dadhich
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लोग
टूट
जाते
हैं
एक
घर
बनाने
में
तुम
तरस
नहीं
खाते
बस्तियाँ
जलाने
में
Bashir Badr
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जिस
ने
इस
दौर
के
इंसान
किए
हैं
पैदा
वही
मेरा
भी
ख़ुदा
हो
मुझे
मंज़ूर
नहीं
Hafeez Jalandhari
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मोहब्बत
एक
ख़ुशबू
है
हमेशा
साथ
चलती
है
कोई
इंसान
तन्हाई
में
भी
तन्हा
नहीं
रहता
Bashir Badr
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इंसाँ
की
ख़्वाहिशों
की
कोई
इंतिहा
नहीं
दो
गज़
ज़मीं
भी
चाहिए
दो
गज़
कफ़न
के
बाद
Kaifi Azmi
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अगर
हुकूमत
तुम्हारी
तस्वीर
छाप
दे
नोट
पर
मेरी
दोस्त
तो
देखना
तुम
कि
लोग
बिल्कुल
फ़ुज़ूल-ख़र्ची
नहीं
करेंगे
Rehman Faris
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शरीफ़
इंसान
आख़िर
क्यूँ
इलेक्शन
हार
जाता
है
किताबों
में
तो
ये
लिक्खा
था
रावन
हार
जाता
है
Munawwar Rana
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मिरे
किरदार
जाने
दे
नज़रअंदाज
कर
दे
ख़ुदा
की
फ़िल्म
है
ये
आदमी
से
क्या
शिकायत
Vikram Sharma
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ठहाका
मार
कर
हथियार
हँसते
नहीं
जीतेंगे
अब
इंसान
हम
सेे
Umesh Maurya
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इश्क़
क़ैस
फ़रहाद
रोमियो
जैसे
ही
कर
सकते
हैं
हम
तो
ठहरे
दस
से
छह
तक
ऑफ़िस
जाने
वाले
लोग
Vashu Pandey
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तुम्हारी
याद
आने
पर
तुम्हारा
नाम
लिखता
हूँ
तुम्हारा
नाम
लिखने
पर
तुम्हारी
याद
आती
है
Sarvjeet Singh
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वैसे
उसकी
सूरत
अब
कुछ
ज़्यादा
याद
नहीं
पर
इतना
मालूम
कि
ठोड़ी
पर
उसकी
तिल
था
Sarvjeet Singh
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दर्द
अब
हद
से
गुज़रने
लग
गए
हैं
टूट
करके
हम
बिखरने
लग
गए
हैं
फिर
किसी
को
भूलने
की
कोशिशों
में
फिर
किसी
को
याद
करने
लग
गए
हैं
वो
कभी
जो
पास
भी
आए
नहीं
थे
फ़ासले
बढ़ने
से
डरने
लग
गए
हैं
कुछ
नए
ज़ख़्मों
की
हमको
आस
है
अब
सब
पुराने
ज़ख़्म
भरने
लग
गए
हैं
वो
ही
जो
दिल
में
उतरने
लग
गए
थे
वो
ही
अब
दिल
से
उतरने
लग
गए
हैं
बस
उसी
पल
से
कि
जब
पैदा
हुए
थे
बस
उसी
पल
से
ही
मरने
लग
गए
हैं
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Sarvjeet Singh
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कुछ
ख़ास
ही
मुझ
सेे
लगावट
है
उसे
बाक़ी
किसी
से
वो
खफ़ा
होती
नहीं
Sarvjeet Singh
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चंद
से
पैसे
कमा
कर
यूँँ
न
तू
ख़ुद
को
ख़ुदा
कर
आदमी
है
ना
तो
मुझ
सेे
आदमी
जैसे
मिला
कर
Sarvjeet Singh
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