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Sarvjeet Singh
dard ab had se guzarne lag ga.e hain
dard ab had se guzarne lag ga.e hain | दर्द अब हद से गुज़रने लग गए हैं
- Sarvjeet Singh
दर्द
अब
हद
से
गुज़रने
लग
गए
हैं
टूट
करके
हम
बिखरने
लग
गए
हैं
फिर
किसी
को
भूलने
की
कोशिशों
में
फिर
किसी
को
याद
करने
लग
गए
हैं
वो
कभी
जो
पास
भी
आए
नहीं
थे
फ़ासले
बढ़ने
से
डरने
लग
गए
हैं
कुछ
नए
ज़ख़्मों
की
हमको
आस
है
अब
सब
पुराने
ज़ख़्म
भरने
लग
गए
हैं
वो
ही
जो
दिल
में
उतरने
लग
गए
थे
वो
ही
अब
दिल
से
उतरने
लग
गए
हैं
बस
उसी
पल
से
कि
जब
पैदा
हुए
थे
बस
उसी
पल
से
ही
मरने
लग
गए
हैं
- Sarvjeet Singh
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याद
भी
आता
नहीं
कुछ
भूलता
भी
कुछ
नहीं
या
बहुत
मसरूफ़
हूँ
मैं
या
बहुत
फ़ुर्सत
में
हूँ
Bharat Bhushan Pant
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याद
उसे
इंतिहाई
करते
हैं
सो
हम
उस
की
बुराई
करते
हैं
Jaun Elia
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ज़रूरत
सब
कराती
है
मोहब्बत
भी
इबादत
भी
नहीं
तो
कौन
बेमतलब
किसी
को
याद
करता
है
Umesh Maurya
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धूप
में
कौन
किसे
याद
किया
करता
है
पर
तिरे
शहर
में
बरसात
तो
होती
होगी
Ameer Imam
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ईद
ख़ुशियों
का
दिन
सही
लेकिन
इक
उदासी
भी
साथ
लाती
है
ज़ख़्म
उभरते
हैं
जाने
कब
कब
के
जाने
किस
किस
की
याद
आती
है
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Farhat Ehsaas
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अब
तो
उन
की
याद
भी
आती
नहीं
कितनी
तन्हा
हो
गईं
तन्हाइयाँ
Firaq Gorakhpuri
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नहीं
आती
तो
याद
उनकी
महीनों
तक
नहीं
आती
मगर
जब
याद
आते
हैं
तो
अक्सर
याद
आते
हैं
Hasrat Mohani
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अच्छे
हो
कर
लौट
गए
सब
घर
लेकिन
मौत
का
चेहरा
याद
रहा
बीमारों
को
Shariq Kaifi
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यहाँ
पे
कल
की
रात
सर्द
थी
हर
एक
रोज़
से
सो
रात
भर
बुझा
नहीं
तुम्हारी
याद
का
अलाव
Siddharth Saaz
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मैं
रहा
उम्र
भर
जुदा
ख़ुद
से
याद
मैं
ख़ुद
को
उम्र
भर
आया
Jaun Elia
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आप
हैं
आक़िल
बहुत
ही
और
हम
जाहिल
बहुत
ही
निभ
न
पाएगा
ये
रिश्ता
यार
यूँँ
मत
मिल
बहुत
ही
फिर
मुहब्बत
कर
रहा
है
बावला
है
दिल
बहुत
ही
डूबना
भी
है
मगर
फिर
पास
है
साहिल
बहुत
ही
ज़िन्दगी
आसान
है
पर
लोग
हैं
मुश्किल
बहुत
ही
चल
पड़े
हैं
इक
सफ़र
पर
दूर
है
मंज़िल
बहुत
ही
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Sarvjeet Singh
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मुझ
में
और
तेरे
दूजे
'आशिक़
में
बस
इतना
अंतर
था
मुझको
तो
तेरे
दिल
में
रहना
था
और
उसको
बिस्तर
में
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Sarvjeet Singh
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आँखों
में
बिन
आँसू
लाए
रो
पाएगा
बोल
वो
जो
तेरे
पास
नहीं
है
खो
पाएगा
बोल
मैं
तेरा
सारे
का
सारा
भी
हो
जाऊँगा
तू
मेरा
सारे
का
सारा
हो
पाएगा
बोल
दिन
जो
जैसे-तैसे
काट
लिया
होगा
तूने
रात
ढले
इक
ही
बिस्तर
पर
सो
पाएगा
बोल
धीरे-धीरे
करके
ये
बढ़ता
ही
जाएगा
मेरी
यादों
का
ये
बोझा
ढो
पाएगा
बोल
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Sarvjeet Singh
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न
बन
अनजान
इतना
आज
जल्दी
आसमाँ
में
आ
कि
थोड़ा
तो
तरस
कर
चाँद
मेरा
चाँद
भूखा
है
Sarvjeet Singh
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इक
शख़्स
था
जो
जा
चुका
है
यार
अब
मुझ
में
बसा
कोई
नया
है
यार
अब
जो
भी
कमाया
ख़र्च
डाला
यार
सब
ले
दे
के
बस
इक
तू
बचा
है
यार
अब
बस
क्या
बताऊँ
हाल
अपना
मैं
तुझे
बिन
रूह
के
तन
पल
रहा
है
यार
अब
सब
देख
कर
के
सोचता
हूँ
मैं
यही
संसार
में
कोई
ख़ुदा
है
यार
अब
काफ़ी
सवालों
के
मिले
हैं
हल
मुझे
फ़ुर्सत
से
जो
ख़ुद
को
पढ़ा
है
यार
अब
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Sarvjeet Singh
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