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Sarvjeet Singh
kuchh lafzon men kaise kah doon apne dil ke jazaaton ko
kuchh lafzon men kaise kah doon apne dil ke jazaaton ko | कुछ लफ़्ज़ों में कैसे कह दूँ अपने दिल के जज़्बातों को
- Sarvjeet Singh
कुछ
लफ़्ज़ों
में
कैसे
कह
दूँ
अपने
दिल
के
जज़्बातों
को
इस
धक-धक
करती
धड़कन
को
इन
पल-पल
चलती
साँसों
को
- Sarvjeet Singh
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जितने
भी
हैं
ज़ख़्म
तुम्हारे
सिल
देगी
होटल
में
खाने
का
आधा
बिल
देगी
सीधे
मुँह
जो
बात
नहीं
करती
है
जो
तुमको
लगता
है
वो
लड़की
दिल
देगी
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Shadab Asghar
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तुम्हें
हम
भी
सताने
पर
उतर
आएँ
तो
क्या
होगा
तुम्हारा
दिल
दुखाने
पर
उतर
आएँ
तो
क्या
होगा
हमें
बदनाम
करते
फिर
रहे
हो
अपनी
महफ़िल
में
अगर
हम
सच
बताने
पर
उतर
आएँ
तो
क्या
होगा
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Santosh S Singh
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किस
तरह
'अमानत'
न
रहूँ
ग़म
से
मैं
दिल-गीर
आँखों
में
फिरा
करती
है
उस्ताद
की
सूरत
Amanat Lakhnavi
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शाम-ए-फ़िराक़
अब
न
पूछ
आई
और
आ
के
टल
गई
दिल
था
कि
फिर
बहल
गया
जाँ
थी
कि
फिर
सँभल
गई
Faiz Ahmad Faiz
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आप
चाहें
तो
कहीं
और
भी
रह
सकते
हैं
दिल
हमारा
है
तो
मर्ज़ी
भी
हमारी
होगी
Shamsul Hasan ShamS
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तो
क्या
ये
हो
नहीं
सकता
कि
तुझ
से
दूर
हो
जाऊँँ
मैं
तुझ
को
भूलने
के
वासते
मजबूर
हो
जाऊँ
सुना
है
टूटने
पर
दिल
सभी
कुछ
कर
गुजरते
हैं
मुझे
भी
तोड़
दो
इतना
कि
मैं
मशहूर
हो
जाऊँ
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SHIV SAFAR
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दिल
में
न
हो
जुरअत
तो
मोहब्बत
नहीं
मिलती
ख़ैरात
में
इतनी
बड़ी
दौलत
नहीं
मिलती
Nida Fazli
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हम
को
दिल
से
भी
निकाला
गया
फिर
शहरस
भी
हम
को
पत्थर
से
भी
मारा
गया
फिर
ज़हरस
भी
Azm Shakri
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हमने
जिस
मासूम
परी
को
अपने
दिल
की
जाँ
बोला
था
उसने
हमको
धोखा
देकर
और
किसी
को
हाँ
बोला
था
सारे
वादे
भूल
गई
तुम
कोई
बात
नहीं
जानेमन
लेकिन
ये
कैसे
भूली
तुम
मेरी
माँ
को
माँ
बोला
था
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Tanoj Dadhich
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हम
को
किस
के
ग़म
ने
मारा
ये
कहानी
फिर
सही
किस
ने
तोड़ा
दिल
हमारा
ये
कहानी
फिर
सही
Masroor Anwar
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कि
तुझको
ढूँढ़
के
देखा
सभी
में
मगर
तू
मिल
नहीं
पाया
किसी
में
गुज़रती
उम्र
गर
ये
साथ
तेरे
मज़ा
कुछ
और
आता
ज़िन्दगी
में
तुझे
भूलूँ
भी
तो
फिर
किस
तरह
से
मकाँ
तेरा
है
मेरी
ही
गली
में
मुसलसल
बढ़
रहा
है
फ़ासला
अब
कि
मुझ
में
और
अच्छे
आदमी
में
वो
जिसको
सेव
करना
था
ना
मुझको
वो
मुझ
सेे
कट
गया
है
हड़बड़ी
में
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Sarvjeet Singh
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क्या
ग़लत
और
क्या
सही
बात
तो
बस
है
वही
जो
न
तुमने
थी
सुनी
जो
न
हमने
थी
कही
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Sarvjeet Singh
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हमने
काफ़ी
देर
तलक
बोला
ख़ुदस
कि
उसे
भूलेंगे
फिर
भी
उसको
भूल
न
पाए
तो
हमने
वो
बात
भुला
दी
Sarvjeet Singh
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मुझ
में
और
तेरे
दूजे
'आशिक़
में
बस
इतना
अंतर
था
मुझको
तो
तेरे
दिल
में
रहना
था
और
उसको
बिस्तर
में
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Sarvjeet Singh
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अब
इस
दुनिया
से
क्या
लेना,मैं
तो
उसकी
बाँहों
में
हूँ
कौन
कहाँ
किसका
कैसा
क्या,मैं
तो
उसकी
बाँहों
में
हूँ
बाहर
इतना
शोर
मचा
है
आज
बड़ी
सर्दी
है,तो
फिर
मुझको
क्यूँ
नईं
लगती
अच्छा,मैं
तो
उसकी
बाँहों
में
हूँ
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Sarvjeet Singh
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