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Sarvjeet Singh
baat karti hai to lagti hai vo jaise saarika
baat karti hai to lagti hai vo jaise saarika | बात करती है तो लगती है वो जैसे सारिका
- Sarvjeet Singh
बात
करती
है
तो
लगती
है
वो
जैसे
सारिका
रूप
ऐसा
तीरगी
में
जगमगाती
तारिका
नैन
जब
भी
देखते
हैं
उसको
नख
से
शिख
तलक
मान
लो
बस
देख
ली
हो
कृष्ण
जी
की
द्वारिका
- Sarvjeet Singh
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शब
भर
इक
आवाज़
बनाई
सुब्ह
हुई
तो
चीख़
पड़े
रोज़
का
इक
मामूल
है
अब
तो
ख़्वाब-ज़दा
हम
लोगों
का
Abhishek shukla
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रात
यूँँ
दिल
में
तिरी
खोई
हुई
याद
आई
जैसे
वीराने
में
चुपके
से
बहार
आ
जाए
Faiz Ahmad Faiz
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बिगड़
गई
थी
जो
दुनिया
सॅंवार
दी
हमने
चढ़ा
के
सर
पे
मुहब्बत
उतार
दी
हमने
अँधेरी
रात
किसी
बे-वफ़ा
की
यादों
में
बहुत
तवील
थी
लेकिन
गुज़ार
दी
हमने
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Hameed Sarwar Bahraichi
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दिन
ढल
गया
और
रात
गुज़रने
की
आस
में
सूरज
नदी
में
डूब
गया,
हम
गिलास
में
Rahat Indori
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आज
की
रात
दिवाली
है
दिए
रौशन
हैं
आज
की
रात
ये
लगता
है
मैं
सो
सकता
हूँ
Azm Shakri
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तन्हाइयाँ
तुम्हारा
पता
पूछती
रहीं
शब-भर
तुम्हारी
याद
ने
सोने
नहीं
दिया
Unknown
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ये
ज़ुल्फ़
अगर
खुल
के
बिखर
जाए
तो
अच्छा
इस
रात
की
तक़दीर
सँवर
जाए
तो
अच्छा
जिस
तरह
से
थोड़ी
सी
तेरे
साथ
कटी
है
बाक़ी
भी
उसी
तरह
गुज़र
जाए
तो
अच्छा
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Sahir Ludhianvi
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सर्द
रात
है
हवा
भी
सोच
मत
पहन
मुझे
सुब्ह
देख
लेंगे
किस
कलर
की
शाल
लेनी
है
Neeraj Neer
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खिड़कियों
से
झाँकती
है
रौशनी
बत्तियाँ
जलती
हैं
घर
घर
रात
में
Mohammad Alvi
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पैसा
कमाने
आते
हैं
सब
राजनीति
में
आता
नहीं
है
कोई
भी
खोने
के
वास्ते
छम्मो
का
मुजरा
सुनते
हैं
नेता
जो
रात
भर
संसद
भवन
में
आते
हैं
सोने
के
वास्ते
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Paplu Lucknawi
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इस
तरह
से
फँस
गए
हैं
ज़िन्दगी
के
खेल
में
लग
रहा
आज़ाद
हैं
हम
हैं
मगर
इक
जेल
में
Sarvjeet Singh
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हम
तुम्हें
दिल
की
बताने
आ
गए
तुम
भी
फिर
सुनने-सुनाने
आ
गए
रास्ते
दो
थे
हमें
चुनना
था
इक
हम
अलग
तीजे
ठिकाने
आ
गए
दूर
से
देखा
तमाशा
अंत
तक
आख़िरश
वो
हक़
जताने
आ
गए
भूल
अपना
वो
गए
बीता
समय
जेब
में
जब
चार
आने
आ
गए
ये
जहाँ
कम
पड़
रहा
था
आपको?
आप
जो
हम
सेे
कमाने
आ
गए
जा
रहे
थे
छत
से
हम
मायूस
हो
और
वो
कपड़े
सुखाने
आ
गए
आज
मिलते
हैं
कहीं
बोला
उन्हें
और
फिर
उनके
बहाने
आ
गए
फ़ासले
लम्हो
के
थे
फिर
क्यूँ
भला
बीच
में
इतने
ज़माने
आ
गए
जाइए
जीवन
मिरे
से
जाइए
आप
फिर
से
दिल
दुखाने
आ
गए
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Sarvjeet Singh
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कैसे
आगे
बढ़
पाता
हम
दोनों
का
ये
रिश्ता
जानाँ
हम
से
करनी
थी
जो
बातें
तुम
ने
कर
ली
और
किसी
से
Sarvjeet Singh
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मैं
कर
नहीं
पाया
ज़रूरी
काम
सब
मैं
कुछ
नहीं
करने
में
काफ़ी
व्यस्त
था
Sarvjeet Singh
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दो
पल
की
मशहूरी
है
आगे
फिर
बे-नूरी
है
कइयों
का
वो
सपना
है
जो
तेरी
मजबूरी
है
शायद
ही
कल
ख़ास
लगे
वो
जो
आज
ज़रूरी
है
घर
के
साथ
जुड़े
हैं
घर
पर
लोगों
में
दूरी
है
मैं
जिसके
बिन
आधा
हूँ
वो
मेरे
बिन
पूरी
है
जो
मरने
तक
करनी
है
जीवन
इक
मज़दूरी
है
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Sarvjeet Singh
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