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Sanskar 'Sanam'
raam par kuchh she'r maine yuñ kahe
raam par kuchh she'r maine yuñ kahe | राम पर कुछ शे'र मैंने यूँँ कहे
- Sanskar 'Sanam'
राम
पर
कुछ
शे'र
मैंने
यूँँ
कहे
दाद
देते
थक
गए
महफ़िल
में
सब
- Sanskar 'Sanam'
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फिर
आज
यारों
ने
तुम्हारी
बात
की
फिर
यार
महफ़िल
में
मिरी
खिल्ली
उड़ी
Harsh saxena
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मोहब्बत
करने
वाले
कम
न
होंगे
तिरी
महफ़िल
में
लेकिन
हम
न
होंगे
Hafeez Hoshiarpuri
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उसने
महफ़िल
से
उठाया
हमको
जिसको
पलकों
पे
बिठाया
हमने
Vishal Bagh
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तिरे
सिवा
भी
कहीं
थी
पनाह
भूल
गए
निकल
के
हम
तिरी
महफ़िल
से
राह
भूल
गए
Majrooh Sultanpuri
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ये
गूँगों
की
महफ़िल
है
निकलना
ही
पड़ेगा
क्या
इतनी
ख़ता
कम
है
कि
हम
बोल
पड़े
हैं
Waseem Barelvi
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शुमार
अपना
भी
हो
जाए
अदब
के
नाम
चीनों
में
ख़ुदा
कुछ
शे'र
कहला
दे
अगर
मुश्किल
ज़मीनों
में
मैं
फ़न्न-ए-शा'इरी
पर
इसलिए
क़ुर्बान
हूँ
रहबर
नहीं
मिलता
ये
गौहर
बादशाहों
के
ख़ज़ीनों
में
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Moid Rahbar
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महफ़िल
में
तेरी
यूँँ
ही
रहे
जश्न-ए-चरागाँ
आँखों
में
ही
ये
रात
गुज़र
जाए
तो
अच्छा
Sahir Ludhianvi
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गर
अदीबों
को
अना
का
रोग
लग
जाए
तो
फिर
गुल
मोहब्बत
के
अदब
की
शाख़
पर
खिलते
नहीं
Afzal Ali Afzal
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पहले
थोड़ी
मुश्किल
होगी
आगे
लेकिन
मंज़िल
होगी
सब
बाराती
शायर
होंगे
मेरी
शादी
महफ़िल
होगी
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Tanoj Dadhich
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मुझ
सेे
होकर
के
ही
बे-ज़ार
चले
जाते
हैं
मेरी
महफ़िल
से
मेरे
यार
चले
जाते
हैं
मुझको
मालूम
है
रहता
नहीं
है
अब
वो
वहाँँ
साल
में
फिर
भी
हम
इक
बार
चले
जाते
हैं
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Dipendra Singh 'Raaz'
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चूमते
होंगे
बदन
तो
सब
चूमता
हूँ
याद
मैं
तेरी
Sanskar 'Sanam'
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इक
पूरी
दुनिया
भी
कम
पड़
जाएगी
मैंने
तुझको
प्यार
किया
है
इस
हद
तक
Sanskar 'Sanam'
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इक
लड़का
जो
यार
अकेला
है
जग
में
इक
लड़की
के
जग
की
भीड़
में
खोया
है
Sanskar 'Sanam'
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कि
प्यासे
को
समुंदर
दिख
रहा
है
ये
क्यूँ
शहरों
में
लश्कर
दिख
रहा
है
मैं
उसको
जान
अपनी
मानता
था
पर
अब
उसका
भी
तेवर
दिख
रहा
है
ये
सब
नेता
जो
जनता
से
बने
हैं
उन्हें
जनता
में
नौकर
दिख
रहा
है
है
वो
अपने
अहम
में
चूर
ऐसा
उसे
हर
शख़्स
कमतर
दिख
रहा
है
थका
हारा
वो
दफ़्तर
से
है
आया
उसे
तो
बस
वो
बिस्तर
दिख
रहा
है
कि
गौरी
ने
जो
दर्पन
में
है
देखा
उसे
तो
ख़ुद
में
शंकर
दिख
रहा
है
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Sanskar 'Sanam'
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देखो
लाखों
भरत
खड़े
हैं
स्वागत
में
अब
आने
में
देर
नहीं
करना
राघव
Sanskar 'Sanam'
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