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Sandeep Gandhi Nehal
yoon urdu ki mithaas utre ki
yoon urdu ki mithaas utre ki | यूँं "उर्दू" की मिठास उतरे की
- Sandeep Gandhi Nehal
यूँं
"उर्दू"
की
मिठास
उतरे
की
सब
कि
मीठी
ज़बान
हो
जाए
- Sandeep Gandhi Nehal
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इज़हार
पे
भारी
है
ख़मोशी
का
तकल्लुम
हर्फ़ों
की
ज़बाँ
और
है
आँखों
की
ज़बाँ
और
Haneef akhgar
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ज़बाँ
हमारी
न
समझा
यहाँ
कोई
'मजरूह'
हम
अजनबी
की
तरह
अपने
ही
वतन
में
रहे
Majrooh Sultanpuri
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तुम्हारा
नाम
जैसे
एक
मीठे
पान
का
बीड़ा
ज़बाँ
पे
रख
लिया
है
रूह
मेरी
सुर्ख़
है
तब
से
Umesh Maurya
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मिल
गए
थे
एक
बार
उस
के
जो
मेरे
लब
से
लब
उम्र
भर
होंटों
पे
अपने
मैं
ज़बाँ
फेरा
किया
Jurat Qalandar Bakhsh
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फिर
चाहे
तो
न
आना
ओ
आन
बान
वाले
झूटा
ही
वअ'दा
कर
ले
सच्ची
ज़बान
वाले
Arzoo Lakhnavi
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हिन्दी
महक
रही
है
लोबान
जैसी
मेरी
लहजे
को
मैं
ने
अपने
उर्दू
किया
हुआ
है
Prof. Rehman Musawwir
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जो
इक
ख़ुदा
नहीं
मिलता
तो
इतना
मातम
क्यूँँ
यहाँ
तो
कोई
मिरा
हम-ज़बाँ
नहीं
मिलता
Kaifi Azmi
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हम
हैं
हिन्दी
और
हमारा
मुल्क
है
हिन्दोस्ताँ
हिन्द
में
पैदा
तसव्वुफ़
के
ज़बाँ-दाँ
कीजिए
Sahir Dehlavi
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है
किसी
जालिम
उदू
की
घात
दरवाज़े
में
है
या
मसाफ़त
है
नई
या
रात
दरवाज़े
में
है
जिस
तरहा
उठती
है
नजरें
बे-इरादा
बार-बार
साफ़
लगता
है
के
कोई
बात
दरवाजे
में
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Farhat Abbas Shah
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सगी
बहनों
का
जो
रिश्ता
रिश्ता
है
उर्दू
और
हिन्दी
में
कहीं
दुनिया
की
दो
ज़िंदा
ज़बानों
में
नहीं
मिलता
Munawwar Rana
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यक़ीं
मत
कर
ज़माने
पर
मिलेगा
सब
कमाने
पर
बहुत
तकलीफ़
होती
है
यूँँं
अपनों
को
जलाने
पर
मरें
वापस
नहीं
आतें
सुनो
ऐसे
बुलाने
पर
ये
घर
का
बोझ
कितना
है
समझ
आया
उठाने
पर
मैं
सबकुछ
भूल
जाता
हूँ
उन्हीं
के
याद
आने
पर
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Sandeep Gandhi Nehal
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जिस्म
थकता
कभी
नहीं
यारों
बस
दिमाग़ी
थकान
होती
है
Sandeep Gandhi Nehal
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तुम
ने
इतना
भुला
दिया
हमको
जब
भी
चाहा
रुला
दिया
हमको
नींद
तो
ख़ैर
आ
नहीं
सकती
प्यार
का
जो
सिला
दिया
हमको
ख़्वाब
झूटे
बड़े
ही,
सच्चे
थे
ख़्वा-मख़्वाह
क्यूँँं
जगा
दिया
हमको
आप
ऐसा
कभी
करोगे
नईं
वक़्त
ने
ही
दग़ा
दिया
हमको
चाहता
हूँ
जिसे
बहुत
ज़्यादा
ख़ाक
में
ही
मिला
दिया
हमको
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Sandeep Gandhi Nehal
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मुहब्बत
गर
नदी
है
तो
किनारे
हैं
जी
हम
दोनों
बनो
हिम्मत
इक
दूजे
के
सहारे
हैं
जी
हम
दोनों
Sandeep Gandhi Nehal
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अगर
चाहते
हो
बहुत
दूर
चलना
ज़ेहन
से
गुमानी
हटानी
पड़ेगी
Sandeep Gandhi Nehal
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