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Sandeep Gandhi Nehal
bandhnon se rihaai mat karna
bandhnon se rihaai mat karna | बंधनों से रिहाई मत करना
- Sandeep Gandhi Nehal
बंधनों
से
रिहाई
मत
करना
यूँँं
कभी
भी
जुदाई
मत
करना
लाख
दुनिया
कहे
बुरा
मुझको
आप
मेरी
बुराई
मत
करना
जो
दिया
दिल
मिरी
निशानी
है
चीज़
अपनी
पराई
मत
करना
इस
क़दर
दूर
कर
मुझे
ख़ुद
से
जान
ये
जग
हँसाई
मत
करना
मुझ
से
ये
बोझ
अब
नहीं
उठता
देखो
तुम
आशनाई
मत
करना
- Sandeep Gandhi Nehal
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है
अब
भी
बिस्तर-ए-जाँ
पर
तिरे
बदन
की
शिकन
मैं
ख़ुद
ही
मिटने
लगा
हूँ
उसे
मिटाते
हुए
Azhar Iqbal
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हाए
क्या
दौर-ए-ज़िंदगी
गुज़रा
वाक़िए
हो
गए
कहानी
से
Gulzar Dehlvi
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गले
में
उस
के
ख़ुदा
की
अजीब
बरकत
है
वो
बोलता
है
तो
इक
रौशनी
सी
होती
है
Bashir Badr
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अगर
मैं
कथा
का
क़लमकार
होता
यक़ीनन
ही
वो
तो
मिरा
यार
होता
लगाती
नहीं
हर
दफ़ा
वो
बहाने
लगा
लेती
सीने
से
गर
प्यार
होता
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Vijay Potter Singhadiya
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दोनों
बिलकुल
झूठे
थे
दोनों
अब
तक
ज़िंदा
हैं
Sabeen Saif
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तुम
ने
स्वेटर
बुना
था
मिरे
नाम
का
मैं
भी
लाया
था
कुछ
सर्दियाँ
जंगली
Shakeel Azmi
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कल
रात
बहुत
ग़ौर
किया
है
सो
हम
उसकी
तय
करके
उठे
हैं
कि
तमन्ना
ना
करेंगे
इस
बार
वो
तल्ख़ी
है
की
रूठे
भी
नहीं
हम
अबके
वो
लड़ाई
है
के
झगड़ा
ना
करेंगे
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Jaun Elia
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प्यास
जहाँ
की
एक
बयाबाँ
तेरी
सख़ावत
शबनम
है
पी
के
उठा
जो
बज़्म
से
तेरी
और
भी
तिश्ना-काम
उठा
Ali Sardar Jafri
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वो
चाहे
मजनूँ
हो,
फ़रहाद
हो
कि
राँझा
हो
हर
एक
शख़्स
मेरा
हम
सबक़
निकलता
है
Munawwar Rana
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तबक़ों
में
रंग-ओ-नस्ल
के
उलझा
के
रख
दिया
ये
ज़ुल्म
आदमी
ने
किया
आदमी
के
साथ
Bakhtiyar Ziya
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जो
इस
दुनिया
से
डरतें
हैं
ख़ाक,
मोहब्बत
करते
हैं
हम
को
देखो
हम
से
सीखो
हम
तो
तुम
पर
ही
मरतें
हैं
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Sandeep Gandhi Nehal
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ये
घर
का
बोझ
कितना
है
समझ
आया
उठाने
पर
Sandeep Gandhi Nehal
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ग़मों
के
ये
बादल
बरसते
रहेंगे
मोहब्बत
की
ख़ातिर
तरसते
रहेंगे
मेरे
अश्क
बन
के
वफ़ाओं
के
मोती
यूँँ
आँखों
से
मेरी
छलकते
रहेंगे
अगर
जो
मिरे
आप
हो
ना
सकें
तो
यहाँ
से
वहाँ
हम
भटकते
रहेंगे
भले
ही
जलेंगे
भले
ही
मरेंगे
सुनो
आप
ख़ातिर
तड़पते
रहेंगे
कमी
से
तुम्हारी
करें
ख़ुद-कुशी
गर
तो
हर
रोज़
फाँसी
लटकते
रहेंगे
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Sandeep Gandhi Nehal
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जो
इस
दुनिया
से
डरते
हैं
ख़ाक
मोहब्बत
करते
हैं
Sandeep Gandhi Nehal
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दिखनें
में
है,
सीधी
लड़की
लेकिन
है
वो,
ज़िद्दी
लड़की
मुझ
को
हरदम,
तड़पाती
है
अपनी
माँ
की
बिगड़ी
लड़की
उस
पर
लिखता
ग़ज़लें
प्यारी
सब
कुछ
है
वो
पगली
लड़की
हम
को
छोड़ा
घर
की
ख़ातिर
या'नी
है
वो,
असली
लड़की
वा'दा
था
इक
संग
जीने
का
'मज़बूरी'
में,
बदली
लड़की
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Sandeep Gandhi Nehal
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