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Sandeep Dubey
achaanak aa gaii vo saamne
achaanak aa gaii vo saamne | अचानक आ गई वो सामने
- Sandeep Dubey
अचानक
आ
गई
वो
सामने
अचानक
दुनिया
गायब
हो
गई
- Sandeep Dubey
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अपनी
दुनिया
भी
चल
पड़े
शायद
इक
रुका
फ़ैसला
किया
जाए
Madan Mohan Danish
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जहाँ
इंसानियत
वहशत
के
हाथों
ज़ब्ह
होती
हो
जहाँ
तज़लील
है
जीना
वहाँ
बेहतर
है
मर
जाना
Gulzar Dehlvi
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ये
दुनिया
ग़म
तो
देती
है
शरीक-ए-ग़म
नहीं
होती
किसी
के
दूर
जाने
से
मोहब्बत
कम
नहीं
होती
Unknown
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फ़न्न-ए-ग़ज़ल-आराई
दे
लहजे
को
सच्चाई
दे
दुनिया
है
जंगल
का
सफ़र
लछमन
जैसा
भाई
दे
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Tariq Shaheen
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एक
हमें
आवारा
कहना
कोई
बड़ा
इल्ज़ाम
नहीं
दुनिया
वाले
दिल
वालों
को
और
बहुत
कुछ
कहते
हैं
Habib Jalib
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बना
कर
हमने
दुनिया
को
जहन्नुम
ख़ुदा
का
काम
आसाँ
कर
दिया
है
Rajesh Reddy
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चलो
ऐ
हिंद
के
सैनिक
कि
लहराएँ
तिरंगा
हम
जिसे
दुनिया
नमन
करती
है
उस
पर्वत
की
चोटी
पर
ATUL SINGH
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सगी
बहनों
का
जो
रिश्ता
रिश्ता
है
उर्दू
और
हिन्दी
में
कहीं
दुनिया
की
दो
ज़िंदा
ज़बानों
में
नहीं
मिलता
Munawwar Rana
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ये
नदी
वर्ना
तो
कब
की
पार
थी
मेरे
रस्ते
में
अना
दीवार
थी
आप
को
क्या
इल्म
है
इस
बात
का
ज़िंदगी
मुश्किल
नहीं
दुश्वार
थी
थीं
कमानें
दुश्मनों
के
हाथ
में
और
मेरे
हाथ
में
तलवार
थी
जल
गए
इक
रोज़
सूरज
से
चराग़
रौशनी
को
रौशनी
दरकार
थी
आज
दुनिया
के
लबों
पर
मुहर
है
कल
तलक
हाँ
साहब-ए-गुफ़्तार
थी
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ARahman Ansari
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तुम
आसमान
पे
जाना
तो
चाँद
से
कहना
जहाँ
पे
हम
हैं
वहाँ
चांदनी
बहुत
कम
है
Shakeel Azmi
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तेरा
भी
सामना
हो
कभी
ग़म
की
शाम
से,
गुजरे
हैं
आज
इश्क़
में
हम
उस
मुक़ाम
से
Sandeep Dubey
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कोई
बनता
ही
नहीं
मेरा
तुम
अपनी
ही
मिसाल
ले
लो
Sandeep Dubey
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जहाँ
चैन
था
मेरी
आवारगी
को
ये
दिल
याद
करता
है
फिर
उस
गली
को
न
दिल
आने
देता
है
दिल
में
किसी
को
करे
कौन
पूरी
तुम्हारी
कमी
को
बहुत
दिन
हुए
उसकी
सूरत
न
देखी
निगाहें
तरसने
लगी
ताज़गी
को
नहीं
लुत्फ़
इस
में
रहा
कुछ
भी
तुम
बिन
चलाए
रखा
है
मगर
ज़िन्दगी
को
मुहब्बत
किसे
खारे
पानी
से
होगी
समुंदर
की
चाहत
तो
है
बस
नदी
को
मसल
दी
गई
माँ
की
ही
कोख
में
जब
कहाँ
फिर
ठिकाना
मिले
उस
कली
को
ठहर
कर
ज़रा
सोचे
अच्छा
बुरा
क्या
कहाँ
इतनी
फ़ुर्सत
है
अब
आदमी
को
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Sandeep Dubey
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मार्च
मसरूफ़
है
हिसाबों
में
कैसे
आए
कोई
ख़यालों
में
Sandeep Dubey
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