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Sandeep dabral 'sendy'
unhen jab se bataaya hai ki qismat men nahin hain ham
unhen jab se bataaya hai ki qismat men nahin hain ham | उन्हें जब से बताया है कि क़िस्मत में नहीं हैं हम
- Sandeep dabral 'sendy'
उन्हें
जब
से
बताया
है
कि
क़िस्मत
में
नहीं
हैं
हम
सुना
हमने
कि
नफ़रत
हो
गई
उनको
लकीरों
से
- Sandeep dabral 'sendy'
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काश
तू
सब
याद
रखती
और
मैं
सब
भूल
जाता
हाँ
मगर
ऐसा
न
होना
भी
तो
क़िस्मत
थी
हमारी
shaan manral
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आप
कहते
थे
कि
रोने
से
न
बदलेंगे
नसीब
उम्र
भर
आप
की
इस
बात
ने
रोने
न
दिया
Sudarshan Fakir
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किसी
को
साल-ए-नौ
की
क्या
मुबारकबाद
दी
जाए
कैलन्डर
के
बदलने
से
मुक़द्दर
कब
बदलता
है
Aitbar Sajid
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मैं
उन्हीं
आबादियों
में
जी
रहा
होता
कहीं
तुम
अगर
हँसते
नहीं
उस
दिन
मेरी
तक़दीर
पर
Zia Mazkoor
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ख़ुदी
को
कर
बुलंद
इतना
कि
हर
तक़दीर
से
पहले
ख़ुदा
बंदे
से
ख़ुद
पूछे
बता
तेरी
रज़ा
क्या
है
Allama Iqbal
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इसी
होनी
को
तो
क़िस्मत
का
लिखा
कहते
हैं
जीतने
का
जहाँ
मौक़ा
था
वहीं
मात
हुई
Manzar Bhopali
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पलटा
दे
तक़दीर
हमारी
आकर
माथा
चूम
हमारा
Siddharth Saaz
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कहीं
गुलाल
के
हिस्से
में
कोई
गाल
नहीं
कहीं
पे
गाल
की
तक़दीर
में
गुलाल
नहीं
Harman Dinesh
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सितारे
और
क़िस्मत
देख
कर
घर
से
निकलते
हैं
जो
बुज़दिल
हैं
मुहूरत
देखकर
घर
से
निकलते
हैं
हमें
लेकिन
सफ़र
की
मुश्किलों
से
डर
नहीं
लगता
कि
हम
बच्चों
की
सूरत
देखकर
घर
से
निकलते
हैं
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Abrar Kashif
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सितारे
कुछ
बताते
हैं
नतीजा
कुछ
निकलता
है
बड़ी
हैरत
में
हैं
मेरा
मुक़द्दर
देखने
वाले
Madan Mohan Danish
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मौन
न
साधो
तुम
प्रियवर
इन
अधरों
को
कुछ
कहने
दो
बाक़ी
का
तुम
जूड़ा
बाँधो
इक
लट
ऐसे
रहने
दो
Sandeep dabral 'sendy'
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केवल
इतनी
सी
इनायत
हो
जाए
याँ
उसको
मेरी
आदत
हो
जाए
होने
को
तो
हो
सकता
है
कुछ
भी
पर
उसको
मुझ
सेे
मुहब्बत
हो
जाए
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Sandeep dabral 'sendy'
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प्यार
भरे
लहजे
से
पेश
अगर
आते
यारों
हाथ
क़लम
क्या
हम
सर
कर
लेते
Sandeep dabral 'sendy'
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क़दम
इक
इक
बढ़ाने
में
सहरस
शाम
हो
जाए
कि
मेरी
रुख़सती
के
दिन
सड़क
भी
जाम
हो
जाए
ज़ियादा
कुछ
नहीं
चाहूँ
यहाँ
चाहूँ
फ़क़त
इतना
यहाँ
इक
रोज़
कुछ
आँसू
मिरे
भी
नाम
हो
जाए
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Sandeep dabral 'sendy'
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घर
जला
कर
किसी
ग़रीब
का
याँ
रोटियाँ
अपनी
सेंकना
न
कभी
Sandeep dabral 'sendy'
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