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Sandeep dabral 'sendy'
sapnon pe jiske pad gaii bhari kamii ik inch ki
sapnon pe jiske pad gaii bhari kamii ik inch ki | सपनों पे जिसके पड़ गई भारी कमी इक इंच की
- Sandeep dabral 'sendy'
सपनों
पे
जिसके
पड़
गई
भारी
कमी
इक
इंच
की
बस
वो
ही
लड़का
जानता
निर्णीत
पैमानों
का
दुख
- Sandeep dabral 'sendy'
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दीदा
ओ
दिल
ने
दर्द
की
अपने
बात
भी
की
तो
किस
से
की
वो
तो
दर्द
का
बानी
ठहरा
वो
क्या
दर्द
बटाएगा
Ibn E Insha
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मैं
शा'इर
हूँ
मोहब्बत
का
मिरे
दुख
भी
रसीले
हैं
Farhat Abbas Shah
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कोई
अटका
हुआ
है
पल
शायद
वक़्त
में
पड़
गया
है
बल
शायद
दिल
अगर
है
तो
दर्द
भी
होगा
इस
का
कोई
नहीं
है
हल
शायद
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Gulzar
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मुझे
छोड़
दे
मेरे
हाल
पर
तिरा
क्या
भरोसा
है
चारा-गर
ये
तिरी
नवाज़िश-ए-मुख़्तसर
मेरा
दर्द
और
बढ़ा
न
दे
Shakeel Badayuni
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दिल
ना-उमीद
तो
नहीं
नाकाम
ही
तो
है
लंबी
है
ग़म
की
शाम
मगर
शाम
ही
तो
है
Faiz Ahmad Faiz
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ये
किस
मक़ाम
पे
लाई
है
ज़िंदगी
हम
को
हँसी
लबों
पे
है
सीने
में
ग़म
का
दफ़्तर
है
Hafeez Banarasi
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वफ़ा
तुम
से
करेंगे
दुख
सहेंगे
नाज़
उठाएँगे
जिसे
आता
है
दिल
देना
उसे
हर
काम
आता
है
Arzoo Lakhnavi
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कभी
हँसता
हूँ
तो
आँखें
कभी
मैं
नम
भी
रखता
हूँ
हर
इक
मुस्कान
के
पीछे
हज़ारों
ग़म
भी
रखता
हूँ
शिफ़ा
भी
दे
नहीं
सकता
मुझे
कोई
मेरा
अपना
नतीजन
मैं
मिरे
ज़ख़्मों
का
ख़ुद
मरहम
भी
रखता
हूँ
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Shubham Dwivedi
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ग़म-ए-हयात
ने
आवारा
कर
दिया
वर्ना
थी
आरज़ू
कि
तिरे
दर
पे
सुब्ह
ओ
शाम
करें
Majrooh Sultanpuri
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ज़ख़्म
दिल
पर
हज़ार
करता
है
और
कहता
है
प्यार
करता
है
दर्द
दिल
में
उतर
गया
कैसे
कोई
अपना
ही
वार
करता
है
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Santosh S Singh
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दौर-ए-अनदेखी
से
जर्जर
हो
गई
दिल
की
दीवारें
खिसक
रही
हैं
उनकी
तस्वीरें
दिल
से
धीरे
धीरे
Sandeep dabral 'sendy'
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चोला
ख़ामोशी
का
ओढ़
लिया
वरना
बोलते
हम
भी
अच्छा
थे
Sandeep dabral 'sendy'
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वो
आईना
भी
ख़ुद
पर
करता
होगा
बेहद
नाज़
जिस
पर
देखा
करती
होगी
यार
वो
सूरत
अपनी
Sandeep dabral 'sendy'
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कभी
मुफ़लिस
की
बस्ती
से
गुज़र
कर
देख
इक
बारी
सियासत
में
यहाँ
अब
कौन
कहता
छल
नहीं
होगा
Sandeep dabral 'sendy'
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इश्क़
के
कितने
ही
क़िस्से
हो
चले
मशहूर
पर
याद
करते
हैं
अमूमन
लोग
राँझा
हीर
को
Sandeep dabral 'sendy'
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