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Sandeep dabral 'sendy'
kabhi mufalis ki bastii se guzar kar dekh ik baari
kabhi mufalis ki bastii se guzar kar dekh ik baari | कभी मुफ़लिस की बस्ती से गुज़र कर देख इक बारी
- Sandeep dabral 'sendy'
कभी
मुफ़लिस
की
बस्ती
से
गुज़र
कर
देख
इक
बारी
सियासत
में
यहाँ
अब
कौन
कहता
छल
नहीं
होगा
- Sandeep dabral 'sendy'
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'अंजुम'
तुम्हारा
शहर
जिधर
है
उसी
तरफ़
इक
रेल
जा
रही
थी
कि
तुम
याद
आ
गए
Anjum Rehbar
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रोशनी
बढ़ने
लगी
है
शहर
की
चाँद
छत
पर
आ
गया
है
देखिए
Divy Kamaldhwaj
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'अल्वी'
ये
मो'जिज़ा
है
दिसम्बर
की
धूप
का
सारे
मकान
शहर
के
धोए
हुए
से
हैं
Mohammad Alvi
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मेरे
ही
संग-ओ-ख़िश्त
से
तामीर-ए-बाम-ओ-दर
मेरे
ही
घर
को
शहर
में
शामिल
कहा
न
जाए
Majrooh Sultanpuri
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जि
यूँँगी
किस
तरह
तेरे
बिना
मत
फिक्र
कर
इसकी
गुज़रती
जिस
शहरस
हूँ
दिवाने
छोड़
आती
हूँ
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Parul Singh "Noor"
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जगह
की
क़ैद
नहीं
थी
कोई
कहीं
बैठे
जहाँ
मक़ाम
हमारा
था
हम
वहीं
बैठे
अमीर-ए-शहर
के
आने
पे
उठना
पड़ता
है
लिहाज़ा
अगली
सफ़ों
में
कभी
नहीं
बैठे
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Mehshar Afridi
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किस
ने
हमारे
शहर
पे
मारी
है
रौशनी
हर
इक
मकाँ
के
ज़ख़्म
से
जारी
है
रौशनी
Nomaan Shauque
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तुझे
कैसे
इल्म
न
हो
सका
बड़ी
दूर
तक
ये
ख़बर
गई
तिरे
शहर
ही
की
ये
शाएरा
तिरे
इंतिज़ार
में
मर
गई
Mumtaz Naseem
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हम
को
दिल
से
भी
निकाला
गया
फिर
शहरस
भी
हम
को
पत्थर
से
भी
मारा
गया
फिर
ज़हरस
भी
Azm Shakri
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ऐसा
बदला
हूँ
तिरे
शहर
का
पानी
पी
कर
झूट
बोलूँ
तो
नदामत
नहीं
होती
मुझ
को
Shahid Zaki
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चराग़ों
से
सबा
की
तुम
रवानी
यार
मत
पूछो
तवायफ़
से
यहाँ
उसकी
जवानी
यार
मत
पूछो
मुलाज़िम
एक
सरकारी
मुहब्बत
ले
गया
याँ
सो
अलम
जानो
हमारा
और
कहानी
यार
मत
पूछो
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Sandeep dabral 'sendy'
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दौर-ए-अनदेखी
से
जर्जर
हो
गई
दिल
की
दीवारें
खिसक
रही
हैं
उनकी
तस्वीरें
दिल
से
धीरे
धीरे
Sandeep dabral 'sendy'
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क़त्ल
अदाएँ
और
निगाहें
करती
हैं
इश्क़
में
मुल्ज़िम
दिल
बेचारा
होता
है
Sandeep dabral 'sendy'
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वा'दे
करके
जो
छोड़
चले
आधे
रस्ते
में
उनके
पीछे
नंगे
पा
दौड़
नहीं
सकते
हम
Sandeep dabral 'sendy'
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ये
मानो
न
मानो
यहाँ
अपना
कल
सुन
रहा
है
ये
पढ़ने
की
इस
उम्र
में
जो
ग़ज़ल
सुन
रहा
है
Sandeep dabral 'sendy'
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