hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Sandeep dabral 'sendy'
raushni kya cheez hai koi timir se poochiye to
raushni kya cheez hai koi timir se poochiye to | रौशनी क्या चीज़ है कोई तिमिर से पूछिए तो
- Sandeep dabral 'sendy'
रौशनी
क्या
चीज़
है
कोई
तिमिर
से
पूछिए
तो
मिट
गई
जिसकी
महत्ता
बस
ज़रा
सी
ही
झलक
से
- Sandeep dabral 'sendy'
Download Sher Image
अब
ऐसे
ज़ाविए
पर
लौ
रखी
जाने
लगी
है
चराग़ों
के
तले
भी
रोशनी
जाने
लगी
है
नया
पहलू
सलीक़े
से
बयाँ
करना
पड़ेगा
कहानी
अब
तवज्जोह
से
सुनी
जाने
लगी
है
Read Full
Khurram Afaq
Send
Download Image
25 Likes
रौशनी
ऐसी
अजब
थी
रंग-भूमी
की
'नसीम'
हो
गए
किरदार
मुदग़म
कृष्ण
भी
राधा
लगा
Iftikhar Naseem
Send
Download Image
16 Likes
इस
लिए
रौशनी
में
ठंडक
है
कुछ
चराग़ों
को
नम
किया
गया
है
Tehzeeb Hafi
Send
Download Image
42 Likes
जहाँ
रहेगा
वहीं
रौशनी
लुटाएगा
किसी
चराग़
का
अपना
मकाँ
नहीं
होता
Waseem Barelvi
Send
Download Image
54 Likes
ये
इश्क़-विश्क़
का
क़िस्सा
तमाम
हो
जाए
सफ़ेद
दाढ़ी
हवस
की
गुलाम
हो
जाए
जवान
लड़कियों
बूढ़ों
से
तुम
रहो
हुश्यार
न
जाने
कौन
कहाँ
आसाराम
हो
जाए
Read Full
Paplu Lucknawi
Send
Download Image
29 Likes
खिड़कियों
से
झाँकती
है
रौशनी
बत्तियाँ
जलती
हैं
घर
घर
रात
में
Mohammad Alvi
Send
Download Image
25 Likes
मुफ़लिसी
थी
और
हम
थे
घर
के
इकलौते
चराग़
वरना
ऐसी
रौशनी
करते
कि
दुनिया
देखती
Kashif Sayyed
Send
Download Image
64 Likes
उम्र
गुज़री
है
माँजते
ख़ुद
को
साफ़
हैं
पर
चमक
नहीं
पाए
डाल
ने
फूल
की
तरह
पाला
ख़ार
थे
ना
महक
नहीं
पाए
Read Full
Vishal Bagh
Send
Download Image
48 Likes
ये
करिश्मा
हुआ
चूमने
से
उसे
तीरगी
पर
खुली
रोशनी
की
समझ
Neeraj Neer
Send
Download Image
13 Likes
ज़मीन-ओ-आसमाँ
को
जगमगा
दो
रौशनी
से
दिसम्बर
आज
मिलने
जा
रहा
है
जनवरी
से
Bhaskar Shukla
Send
Download Image
39 Likes
Read More
मरने
से
पहले
यहाँ
जीते
जी
मरना
पड़ता
है
सो
इतना
आसाँ
है
कहाँ
ये
ख़ुद-कुशी
की
मौत
मरना
Sandeep dabral 'sendy'
Send
Download Image
1 Like
सुब्ह
होने
में
ज़माने
लगते
हैं
हिज्र
में
जब
दर्द
खाने
लगते
हैं
ख़ून
कम
होने
लगे
मुफ़लिस
का
तब
जब
गगन
में
मेघ
छाने
लगते
हैं
जब
सितारे
होते
हैं
गर्दिश
में
तब
लोग
अपने
आज़माने
लगते
हैं
ग़ैर
से
उम्मीद
हम
क्या
ही
करें
दूर
जब
अपने
ही
जाने
लगते
हैं
साल
होते
पाँच
पूरे
जैसे
ही
दीन
उनको
याद
आने
लगते
हैं
दीन
बस्ती
में
सियासत-दाँ
चुनाव
आते
ही
तब
भिनभिनाने
लगते
हैं
डोर
जब
कमज़ोर
हो
कानून
की
चोर
भी
आँखें
दिखाने
लगते
हैं
जब
अचानक
छोड़
देती
साथ
माँ
बोझ
सब
बापू
के
शाने
लगते
हैं
मूँद
ले
आँखें
पिता
जब,
तब
यहाँ
घर
के
छोटू
भी
कमाने
लगते
हैं
Read Full
Sandeep dabral 'sendy'
Download Image
1 Like
बेहतर
की
जुस्तुजू
में
याँ
बेहतरीन
खोया
जिसने
भी
यार
से
अपने
याँ
यक़ीन
खोया
Sandeep dabral 'sendy'
Send
Download Image
0 Likes
वा'दे
करके
जो
छोड़
चले
आधे
रस्ते
में
उनके
पीछे
नंगे
पा
दौड़
नहीं
सकते
हम
Sandeep dabral 'sendy'
Send
Download Image
0 Likes
जो
किताबें
थी
पढ़ी
वो
सब
फ़ुज़ूल
हो
गईं
ज़िंदगी
ने
वो
सवाल
पूछे
जो
पढ़े
न
थे
Sandeep dabral 'sendy'
Send
Download Image
0 Likes
Read More
Akbar Allahabadi
Krishna Bihari Noor
Shariq Kaifi
Mohammad Alvi
Anjum Rehbar
Abhishar Geeta Shukla
Ali Zaryoun
Zehra Nigaah
Amjad Islam Amjad
Asad Bhopali
Get Shayari on your Whatsapp
Tasawwur Shayari
Dhoop Shayari
Festive Shayari
Dil Shayari
Patang Shayari