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Sandeep dabral 'sendy'
nazaara jo hai yah is pal vo agle pal nahin hogaa
nazaara jo hai yah is pal vo agle pal nahin hogaa | नज़ारा जो है यह इस पल वो अगले पल नहीं होगा
- Sandeep dabral 'sendy'
नज़ारा
जो
है
यह
इस
पल
वो
अगले
पल
नहीं
होगा
अभी
जी
भर
के
जी
लो
क्या
पता
यह
कल
नहीं
होगा
- Sandeep dabral 'sendy'
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सब
यार
सोचते
थे
रहेगा
वही
समाँ
इक
मैं
ही
बस
बचा
हूँ
कोई
सौ
पचास
में
Amaan Pathan
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दो
मुल्कों
के
सियासी
खेल
में
जाने
यहाँ
पर
कितनों
के
घर
उजड़े
हैं
मौला
वही
हर
सुब्ह
मंज़र
देखना
पड़ता
हज़ारों
लोग
यूँँ
ही
मरते
हैं
मौला
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Harsh saxena
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और
भी
दुनिया
में
मंज़र
ख़ूब-सूरत
हैं
मगर
तेरी
ज़ुल्फ़ों
झटकने
से
सुहाना
कुछ
नहीं
Alankrat Srivastava
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इश्क़
का
ज़ौक़-ए-नज़ारा
मुफ़्त
में
बदनाम
है
हुस्न
ख़ुद
बे-ताब
है
जल्वा
दिखाने
के
लिए
Asrar Ul Haq Majaz
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ऐ
शौक़-ए-नज़ारा
क्या
कहिए
नज़रों
में
कोई
सूरत
ही
नहीं
ऐ
ज़ौक़-ए-तसव्वुर
क्या
कीजे
हम
सूरत-ए-जानाँ
भूल
गए
Asrar Ul Haq Majaz
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एक
दफ़ा
बस
वापस
मंज़र
ऐसा
हो
हाथ
मेरा
सीधा
और
उल्टा
तेरा
हो
Tanoj Dadhich
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खिला
कर
भंग
की
गुजिया
समा
रंगीन
कर
दो
तुम
बड़ी
मुश्क़िल
से
तो
हो
पाया
है
दीदार
होली
में
Vijay Anand Mahir
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तेरी
आँखों
में
सारे
मनज़र
हैं
हम
कहाँ
हैं,
कहाँ
थे,
कब
होंगे
Meem Alif Shaz
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जो
बिस्मिल
बना
दे
वो
क़ातिल
तबस्सुम
जो
क़ातिल
बना
दे
वो
दिलकश
नज़ारा
मोहब्बत
का
भी
खेल
नाज़ुक
है
कितना
नज़र
मिल
गई
आप
जीते
मैं
हारा
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Nushur Wahidi
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रोज़
बस्ते
हैं
कई
शहर
नए
रोज़
धरती
में
समा
जाते
हैं
Kaifi Azmi
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महफ़िल
में
जब
जब
कनखी
से
निगरानी
करती
है
वो
मैं
अपना
सब
कुछ
गिरवी
रख
दूँ
उसके
इस
मंज़र
पर
Sandeep dabral 'sendy'
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चाह
रक़ीब
यहाँ
रखते
हैं
अब
उसके
लब
की
मैं
तो
केवल
भूखा
था
उसकी
पेशानी
का
Sandeep dabral 'sendy'
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जब
याद
आते
संग
बिताए
वो
लम्हें
सो
तब
ज़ार-ज़ार
अश्कों
की
बरसात
होती
है
Sandeep dabral 'sendy'
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चूड़ियों
का
नाप
लेने
आया
था
मैं
उसकी
सम्त
देख
कर
हाथों
में
कंगन
मैं
पलट
कर
आ
गया
Sandeep dabral 'sendy'
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ग़ज़ल
गढ़ना
है
काम
मियाँ
पानी
लिखना
पानी
पर
रात
उला
खाए
तो
दिन
गुज़रे
मतला,
मक़ता,
सानी
पर
Sandeep dabral 'sendy'
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