vo guzra karti hai yaar yahaañ jis jis bhi upvan se | वो गुज़रा करती है यार यहाँ जिस जिस भी उपवन से

  - Sandeep dabral 'sendy'
वोगुज़राकरतीहैयारयहाँजिसजिसभीउपवनसे
नींदगुलोंकीटूटाकरतीहैपायलकीछनछनसे
हैमुस्काननिरालीउसकीऔरआँखोंकाक्याकहना
बसअच्छेअच्छोंकोकायलकरदेतीहैचितवनसे
हैंदर्शनकेअभिलाषीउसकेबचपनसेपचपनतक
धूपउसेझाँकाकरतीहैयाँहुजरेमेंरौज़नसे
यारअनोखाजादूहैयाँउसकीकोमलबाँहोंमें
मुरझाएचेहरेखिलजातेहैंबसइकआलिंगनसे
यारमुसलसलछूताहैजोउसकेनाज़ुकहाथोंको
मुझकोरश्क़लगाहैहोनेअबउसकेउसकंगनसे
  - Sandeep dabral 'sendy'
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