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Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"
aks bhi uskaa naacheez hi lag raha
aks bhi uskaa naacheez hi lag raha | अक्स भी उसका नाचीज़ ही लग रहा
- Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"
अक्स
भी
उसका
नाचीज़
ही
लग
रहा
मसअला
यह
भी
है
की
वो
ख़ुद
ख़ास
है
- Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"
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मेरा
बटुआ
नहीं
होता
है
ख़ाली
तेरी
तस्वीर
की
बरकत
रही
माँ
Satya Prakash Soni
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तेरी
तस्वीर
अगर
बनाते
हम
तेरे
बारे
में
क्या
बताते
हम
ढूँढ़ना
है
उसे
अंधेरे
में
और
दिया
भी
नहीं
बनाते
हम
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Tajdeed Qaiser
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जिस
शख़्स
से
शदीद
मोहब्बत
हो
तुमको
वो
तस्वीर
में
दिखाया
गया
हो
किसी
के
साथ
Mueed Mirza
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अपनी
आँखों
से
तेरा
अक्स
हटाने
के
लिए
जो
तुझे
देख
लें,
वो
बाद
में
क्या
देखते
हैं?
Harman Dinesh
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फ़र्क़
इतना
है
कि
तू
पर्दे
में
और
मैं
बे-हिजाब
वर्ना
मैं
अक्स-ए-मुकम्मल
हूँ
तिरी
तस्वीर
का
Asad Bhopali
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एक
कमी
थी
ताज-महल
में
मैंने
तिरी
तस्वीर
लगा
दी
Kaif Bhopali
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बहुत
मज़ाक़
उड़ाते
हो
तुम
ग़रीबों
का
मदद
तो
करते
हो
तस्वीर
खींच
लेते
हो
Nawaz Deobandi
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नमक
हल्दी
ज़ियादा
दाल
में
छोड़ा
गया
था
बतायें
क्या
हमें
किस
हाल
में
छोड़ा
गया
था
अधूरी
एक
उस
तस्वीर
पर
सब
मर
मिटे
थे
बनाकर
यार
डिम्पल
गाल
में
छोड़ा
गया
था
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Atul K Rai
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तजस्सुस
है
मुझे
बर
अक्स
होगा
ये
जहाँ
कैसा
मुझे
बस
इक
दफ़ा
शीशे
के
दूजे
पार
जाना
है
Aditya Pandey
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एक
तस्वीर
बनाऊँगा
तेरी
और
फिर
हाथ
लगाऊंगा
तुझे
Nasir khan 'Nasir'
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हुस्न
पर
ग़ुरूर
होना
लाज़मी
तो
है
मगर
हुस्न
ढलता
भी
है
और
ग़ुरूर
टूटता
भी
है
Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"
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ज़िंदगी
के
खाते
से
इक
साल
और
कम
हो
गया
है
और
बधाई
दे
रहे
हैं
लोग
इक
दूजे
को
इसकी
Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"
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इक
बला
ए
हुस्न
क्या
क्या
कर
गई
बेरुखी
करके
जो
तन्हा
कर
गई
कम
मुहब्बत
और
ज़्यादा
कर
गई
भरते
ज़ख़्मों
को
भी
ताज़ा
कर
गई
फूल
तितली
ख़ास
थे
कितने
कभी
इक
नजर
में
सब
को
सादा
कर
गई
ख़्वाब
में
माशूका
सी
पेश
आती
थी
रूबरू
वो
ख़्वाब
झूठा
कर
गई
इतना
खारा
है
समुंदर
सरफिरा
इसको
छू
कर
कितना
मीठा
कर
गई
कुछ
कदम
तो
साथ
लेकर
भी
चली
मोड़
पर
आख़िर
में
चलता
कर
गई
हक
जताती
रह
गई
दुनिया
"शफ़क़"
चूमकर
वो
तुझको
जूठा
कर
गई
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Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"
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साथ
हँसने
लगे
वो
हँसी
चाहिए
उम्र
भर
के
लिए
बस
यही
चाहिए
बिन
तेरे
हो
अगर
चार
दिन
ज़िंदगी
एक
पल
भी
नहीं
ज़िंदगी
चाहिए
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Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"
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जिस
तरह
से
निकाले
गए
आज
हम
दर्द
अपना
कहें
तो
किसे
आज
हम
ज़िंदगी
के
सिखाए
थे
मतलब
जिन्हें
क़त्ल
उनके
ही
हाथों
हुए
आज
हम
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Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"
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