hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
salman khan "samar"
tire dar se yuñ uth kar main na jaaunga kisi aur dar
tire dar se yuñ uth kar main na jaaunga kisi aur dar | तिरे दर से यूँँ उठ कर मैं न जाऊँगा किसी और दर
- salman khan "samar"
तिरे
दर
से
यूँँ
उठ
कर
मैं
न
जाऊँगा
किसी
और
दर
तिरे
ही
दर
पे
मरने
की
क़सम
खाई
है
मैंने
तो
- salman khan "samar"
Download Sher Image
पहले
सौ
बार
इधर
और
उधर
देखा
है
तब
कहीं
डर
के
तुम्हें
एक
नज़र
देखा
है
Majrooh Sultanpuri
Send
Download Image
64 Likes
मुझ
ऐसा
शख़्स
अगर
क़हक़हों
से
भर
जाए
ये
साँस
लेती
उदासी
तो
घुट
के
मर
जाए
वो
मेरे
बाद
तरस
जाएगा
मोहब्बत
को
उसे
ये
कहना
अगर
हो
सके
तो
मर
जाए
Read Full
Rakib Mukhtar
Send
Download Image
76 Likes
और
हुआ
भी
ठीक
वो
ही
जिसका
डर
था
बोझ
इतना
रख
दिया
था
बुलबुले
पर
Siddharth Saaz
Send
Download Image
14 Likes
मैं
कैसे
मान
लूँ
कि
इश्क़
बस
इक
बार
होता
है
तुझे
जितनी
दफ़ा
देखूँ
मुझे
हर
बार
होता
है
तुझे
पाने
की
हसरत
और
डर
ना-कामियाबी
का
इन्हीं
दो
तीन
बातों
से
ये
दिल
दो
चार
होता
है
Read Full
Bhaskar Shukla
Send
Download Image
46 Likes
कहा
जो
कृष्ण
ने
गीता
में
रक्खेगा
अगर
तू
याद
भले
जितना
घना
जंगल
हो
पर
तू
खो
नहीं
सकता
Amaan Pathan
Send
Download Image
12 Likes
ख़ाली
पड़ा
है
और
उदासी
भरा
है
दिल
सो
लोग
इस
मकान
से
आगे
निकल
गए
Ankit Maurya
Send
Download Image
51 Likes
हम
किसी
दर
पे
न
ठिटके
न
कहीं
दस्तक
दी
सैकड़ों
दर
थे
मिरी
जाँ
तिरे
दर
से
पहले
Ibn E Insha
Send
Download Image
29 Likes
ज़िंदगी
भर
वो
उदासी
के
लिए
काफ़ी
है
एक
तस्वीर
जो
हँसते
हुए
खिंचवाई
थी
Yasir Khan
Send
Download Image
75 Likes
तू
किसी
और
ही
दुनिया
में
मिली
थी
मुझ
सेे
तू
किसी
और
ही
मौसम
की
महक
लाई
थी
डर
रहा
था
कि
कहीं
ज़ख़्म
न
भर
जाएँ
मेरे
और
तू
मुट्ठियाँ
भर-भर
के
नमक
लाई
थी
Read Full
Tehzeeb Hafi
Send
Download Image
330 Likes
एक
नया
'आशिक़
है
उसका,
जान
छिड़कता
है
उसपर
मुझको
डर
है
वो
भी
इक
दिन
मय-ख़ाने
से
निकलेगा
Siddharth Saaz
Send
Download Image
55 Likes
Read More
मन
का
मिलना
मिलना
है
अपना
मिलना
क्या
मिलना
salman khan "samar"
Send
Download Image
0 Likes
बैठा
हूँ
अकेला
मैं
किसी
रोड़
किनारे
दुनिया
के
नहीं
तेरी
ही
यादों
के
सहारे
उलझे
हुए
हैं
आज
भी
दुनिया
में
कहीं
हम
फ़ुर्सत
नहीं
मिलती
कि
तिरी
ज़ुल्फ़
सँवारे
हर
रीत
ज़माने
की
'समर'
तोड़
दूँ
मैं
बस
इक
बार
मुझे
कोई
तो
शिद्दत
से
पुकारे
Read Full
salman khan "samar"
Download Image
0 Likes
जो
शख़्स
जी
रहा
हो
उसूलों
की
ज़िंदगी
डरता
नहीं
वो
शख़्स
ज़माने
को
देखकर
salman khan "samar"
Send
Download Image
0 Likes
मैं
तेरी
नज़र
से
कुछ
यूँँ
दूर
हो
जाऊँगा
जैसे
कि
मुसाफ़िर
से
हो
दूर
कोई
मंज़िल
salman khan "samar"
Send
Download Image
0 Likes
हिफ़ाज़त
करूँँगा
बुरी
हर
बला
से
मुझे
आँख
में
तुम
बसा
कर
तो
देखो
salman khan "samar"
Send
Download Image
0 Likes
Read More
Akbar Allahabadi
Krishna Bihari Noor
Shariq Kaifi
Mohammad Alvi
Anjum Rehbar
Abhishar Geeta Shukla
Ali Zaryoun
Zehra Nigaah
Amjad Islam Amjad
Asad Bhopali
Get Shayari on your Whatsapp
Shadi Shayari
Muflisi Shayari
Dar Shayari
Dost Shayari
Ilm Shayari