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SALIM RAZA REWA
main din ko raat kahooñ vo bhi din ko raat kahe
main din ko raat kahooñ vo bhi din ko raat kahe | मैं दिन को रात कहूँ वो भी दिन को रात कहे
- SALIM RAZA REWA
मैं
दिन
को
रात
कहूँ
वो
भी
दिन
को
रात
कहे
यूँँ
आँख
मूँद
के
वो
ऐतिबार
करता
है
- SALIM RAZA REWA
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किताबें,
रिसाले
न
अख़बार
पढ़ना
मगर
दिल
को
हर
रात
इक
बार
पढ़ना
Bashir Badr
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माँग
सिन्दूर
भरी
हाथ
हिनाई
करके
रूप
जोबन
का
ज़रा
और
निखर
आएगा
जिसके
होने
से
मेरी
रात
है
रौशन
रौशन
चाँद
में
आज
वही
अक्स
नज़र
आएगा
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Azhar Iqbal
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हिज्र
में
अब
वो
रात
हुई
है
जिस
में
मुझको
ख़्वाबों
में
रेल
की
पटरी,
चाकू,
रस्सी,
बहती
नदियाँ
दिखती
हैं
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Dipendra Singh 'Raaz'
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रात
बेचैन
सी
सर्दी
में
ठिठुरती
है
बहुत
दिन
भी
हर
रोज़
सुलगता
है
तिरी
यादों
से
Amit Sharma Meet
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बिगड़
गई
थी
जो
दुनिया
सॅंवार
दी
हमने
चढ़ा
के
सर
पे
मुहब्बत
उतार
दी
हमने
अँधेरी
रात
किसी
बे-वफ़ा
की
यादों
में
बहुत
तवील
थी
लेकिन
गुज़ार
दी
हमने
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Hameed Sarwar Bahraichi
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इक
ओर
तेरा
ख़्वाब
जो
हर
रात
आता
है
दूजा
वो
अपना
वस्ल
जो
हो
ही
नहीं
रहा
Aqib khan
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नींद
भी
जागती
रही
पूरे
हुए
न
ख़्वाब
भी
सुब्ह
हुई
ज़मीन
पर
रात
ढली
मज़ार
में
Adil Mansuri
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यहाँ
पे
कल
की
रात
सर्द
थी
हर
एक
रोज़
से
सो
रात
भर
बुझा
नहीं
तुम्हारी
याद
का
अलाव
Siddharth Saaz
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हमारी
याद
आने
पर
अकेली
रात
में
तुम
भी
कभी
पंखा
कभी
टीवी
कभी
दीवार
देखोगे
Ambar
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मैं
जिस
के
साथ
कई
दिन
गुज़ार
आया
हूँ
वो
मेरे
साथ
बसर
रात
क्यूँँ
नहीं
करता
Tehzeeb Hafi
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ख़ुशियों
से
कह
दो
शोर
मचाएँ
न
इस-क़दर
मेरे
ग़मों
को
नींद
लगी
है
अभी-अभी
SALIM RAZA REWA
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फफोले
पड़
चुके
आँखों
में
ज़ौक़-ए-दीद
बाक़ी
है
बहुत
है
दूर
तू
मुझ
सेे
मगर
उम्मीद
बाक़ी
है
मेरी
जाँ
लौट
के
आजा
दिल-ए-बीमार
की
ख़ातिर
सभी
की
हो
गई
है
ईद
मेरी
ईद
बाक़ी
है
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SALIM RAZA REWA
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इश्क़
का
जाम
पिला
दे
मुझको
और
बीमार
बना
दे
मुझको
ख़ुशनुमा
रंग
ये
दिलकश
बातें
तेरी
आदत
न
लगा
दे
मुझको
अपनी
उल्फ़त
से
बचा
ले
या
फिर
अपनी
नफ़रत
से
मिटा
दे
मुझको
कोई
इल्ज़ाम
लगाकर
मुझ
पर
अपने
हाथों
से
सज़ा
दे
मुझको
तेरा
हर
फ़ैसला
सर
आँखों
पर
ज़हर
दे
या
कि
दवा
दे
मुझको
सारी
दुनिया
से
अलग
हो
जाऊँ
ख़्वाब
इतने
न
दिखा
दे
मुझको
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SALIM RAZA REWA
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ख़यालों
में
महकती
है
मुसलसल
प्यार
की
ख़ुशबू
तेरी
यादों
के
लश्कर
ने
कभी
तन्हा
नहीं
छोड़ा
SALIM RAZA REWA
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ख़ूब
धोया
बदन
को
मल
मल
कर
तेरी
ख़ुशबू
मगर
नहीं
जाती
SALIM RAZA REWA
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