tumhaari yaad ke lashkar udaas baithe hain | तुम्हारी याद के लश्कर उदास बैठे हैं

  - SALIM RAZA REWA
तुम्हारीयादकेलश्करउदासबैठेहैं
हसीनख़्वाबकेमंज़रउदासबैठेहैं
तमामगलियाँहैंख़ामोशतेरेजानेसे
तमामराहकेपत्थरउदासबैठेहैं
बिनापिएतोसुनाहैउदासरिंदोंको
मियाँजीआपतोपीकरउदासबैठेहैं
ज़रासीबातपेरिश्तोंकोकरदियाघाइल
ज़रासीबातकोलेकरउदासबैठेहैं
तेरेबग़ैरहरएकशयकीआँखपुरनमहै
हमीनहींमह-ओ-अख़्तरउदासबैठेहैं
तमामशहरतरसताहैउनसेेमिलनेको
‘रज़ा’जीआपतोमिलकरउदासबैठेहैं
  - SALIM RAZA REWA
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