sharbat-e-deed nigaahon ko pilaane aa.e | शर्बत-ए-दीद निगाहों को पिलाने आए

  - SALIM RAZA REWA
शर्बत-ए-दीदनिगाहोंकोपिलानेआए
औरबिगड़ीहुईक़िस्मतकोबनानेआए
चाँदतारेभीयहाँबनकेदिवानेआए
तेरीरहमतकेसमुंदरमेंनहानेआए
रश्ककरतेहैंजिन्हेदेखकेजाम-ओ-मीना
मस्तनज़रोंसेवहीजामपिलानेआए
तेरेदीदारसेआँखोंकोसुकूँमिलताहै
ख़ुदसेकर-करकेकईबारबहानेआए
तेरीनिस्बतसेज़मानेकीख़ुशीहासिलहै
मेरेहाथोंमेंतोअनमोलख़ज़ानेआए
  - SALIM RAZA REWA
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