kitna be-rang ye zamaana hai | कितना बे-रंग ये ज़माना है

  - SALIM RAZA REWA
कितनाबे-रंगयेज़मानाहै
आसमानोंमेंघरबनानाहै
मैंज़मीनोंसेउठगयाकबका
अबफ़लकमेराआशियानाहै
तेरीउल्फ़तकीओढ़करचादर
सारीदुनियासेदूरजानाहै
कोईख़्वाहिशनहींकोईग़म
अपनाअंदाज़सूफ़ियानाहै
मुश्किलोंसेनिबाहकरलूँगा
साथतुझकोमगरनिभानाहै
ग़मफ़क़तहीनहींहैदामनमें
चंदख़ुशियोंकाभीख़ज़ानाहै
मुझकोख़्वाहिशहैउससेेमिलनेकी
उसकेहोंटोंपेबसबहानाहै
एकदिनख़्वाबमेंहीजाओ
तुमकोफिरसेगलेलगानाहै
दिलयेकहताहैतुमचलेआओ
आजमौसमबड़ासुहानाहै
ज़ख़्म-ए-उल्फ़तसँभालेक्यूँ'रज़ा'
अपनेजीनेकायेबहानाहै
  - SALIM RAZA REWA
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