mujhse vo jaan-e-jaanaan kya ho gaii KHataa hai | मुझ सेे वो जान-ए-जानाँ क्या हो गई ख़ता है


  - SALIM RAZA REWA
मुझसेेवोजान-ए-जानाँक्याहोगईख़ताहै
जोयक-ब-यकहीमुझसेेतूहोगयाख़फ़ाहै
टूटीहुईहैंशाख़ेंमुरझागईहैंकलियाँ
तेरेबग़ैरदिलकागुलशनउजड़गयाहै
आँखेंहैंसुर्ख़रुख़परज़ुल्फ़ेंबिखररहीहैं
हिज्र-ए-सनममेंशबभरक्याजागतारहाहै
तूनेतमामखुशियाँऔरोंकेनामकरदीं
तेरीइसीअदानेदीवानाकरदियाहै
फाँसीकीहुक़्मदेकरख़्वाहिशवोपूछतेहैं
अबक्याउन्हेंबताऍंक्याआख़िरीरज़ाहै
  - SALIM RAZA REWA
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