ham dar-b-dar kii thokren khaate chale ga.e | हम दर-ब-दर की ठोकरें खाते चले गए

  - SALIM RAZA REWA
हमदर-ब-दरकीठोकरेंखातेचलेगए
फिरभीतरानेप्यारकेगातेचलेगए
कोशिशतोकीभँवरनेडुबोनेकीबारहा
हमकश्ती-ए-हयातबचातेचलेगए
अपनाकहाकिसीनेगलेसेलगालिया
यूँँदुश्मनोंकोदोस्तबनातेचलेगए
रुसवाइयोंकेडरसेकभीबज़्म-ए-नाज़में
हँस-हँसकेदर्द-ए-दिलकोछुपातेचलेगए
करताहैजोसभीकेमुक़द्दरकाफ़ैसला
उसकीरज़ाकीशम्अजलातेचलेगए
  - SALIM RAZA REWA
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