kharaabi ke nazaare ug rahe hain | ख़राबी के नज़ारे उग रहे हैं

  - SALIM RAZA REWA
ख़राबीकेनज़ारेउगरहेहैं
मुनाफ़ेमेंख़सारेउगरहेहैं
तेरेहोटोंपेकलियाँखिलरहीहैं
मेरेआँखोंमेंतारेउगरहेहैं
फ़लकचू
मेंहैधरतीकेलबोंको
किधरतीसेकिनारेउगरहेहैं
तुम्हारेइश्क़मेंजलनेकीख़ातिर
बदनमेंकुछशरारेउगरहेहैं
फ़लककेचाँदकोछूनेकीज़िदमें
'रज़ाजी'परहमारेउगरहेहैं
  - SALIM RAZA REWA
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