har ek zulm gunah-o-khata se darte hain | हर एक ज़ुल्म गुनाह-ओ-ख़ता से डरते हैं

  - SALIM RAZA REWA
हरएकज़ुल्मगुनाह-ओ-ख़तासेडरतेहैं
जिन्हेंहैख़ौफ़-ए-ख़ुदावोख़ुदासडरतेहैं
मुश्किलोंसेजौर-ओ-जफ़ासेडरतेहैं
ग़म-ए-हयातकीकालीघटासेडरतेहैं
किसीग़रीबकीआह-ए-जिगरलगजाए
इसीलिएतोहर-इकबद्दुआसेडरतेहैं
बड़ासुकूनहैचैन-ओ-क़रारहैदिलको
बदलतेदौरकीआब-ओ-हवासेडरतेहैं
जिन्हेंख़बरहीनहींइश्क़भीइबादतहै
वहीतोप्यार-मोहब्बतवफ़ासेडरतेहैं
येछीनलेतीहैसब्र-ओ-क़रारकाआलम
किसीहसीनकीकाफ़िर-अदासडरतेहैं
ख़ता-मुआफ़तोहोतीहैजानतेहैं'रज़ा'
किसीगुनाहकीहमइंतिहासेडरतेहैं
  - SALIM RAZA REWA
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