koii mausam ho ye rangeen banaa deta hai | कोई मौसम हो ये रंगीन बना देता है

  - SALIM RAZA REWA
कोईमौसमहोयेरंगीनबनादेताहै
इश्क़जबहदसेगुज़रताहैमज़ादेताहै
जबभीहोताहैमेरेसाथमेंदिलबरमेरा
मुश्किलोंकोमेरीआसानबनादेताहै
उम्रभरमुश्किलेंसहताहैवोबच्चोंकेलिए
अपनीसबख़्वाहिशेंमिट्टीमेंमिलादेताहै
हरख़ुशीछोड़केपरदेसमेंअपनोंकेलिए
क़तरा-क़तरावोपसीनेकाबहादेताहै
इश्क़काजाम'रज़ा'पीकेबहकजाओगे
इश्क़ज़ाहिदकोभीदीवानाबनादेताहै
  - SALIM RAZA REWA
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