samajh raha tha jise apna Vaaqaii ab tak | समझ रहा था जिसे अपना वाक़ई अब तक

  - SALIM RAZA REWA
समझरहाथाजिसेअपनावाक़ईअबतक
वोकररहाथामेरेदिलसेदिल-लगीअबतक
हसीनजालमोहब्बतकाफेंकनेवाले
समझचुकाहूँहरइकचालमैंतेरीअबतक
मेरेबदनकालहूख़ुश्कहोगयाहोता
अगरहोतीमेरेजिस्ममेंनमीअबतक
रदीफ़क़ाफ़ियाबंदिशख़यालसबतूहै
मैंतेरेनामसेकरताहूँशा'इरीअबतक
उछल-उछलकेख़ुशीनाचतीथीआँगनमें
खटकरहीहैउसीबातकीकमीअबतक
वोजिसकेहुस्नकाचर्चाथासारेआलममें
भटकरहीहैवोगलियोंमेंबावरीअबतक
उमड़रहाहैसमुंदरमेरेख़यालोंका
टपकरहीहैनिगाहोंसेआगहीअबतक
  - SALIM RAZA REWA
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