lagti hi nahin uski koi bhi davaa mujhko | लगती ही नहीं उसकी कोई भी दवा मुझको

  - Sagar Sahab Badayuni
लगतीहीनहींउसकीकोईभीदवामुझको
तबकहींलगीजाकरएकबद्दुआमुझको
आख़िरीसहाराभीमरगयामिराआख़िर
चीख़चीख़करसबकोकहताथाबचामुझको
कौनकरताहैऐसेअपनेग़मकीरखवाली
हालक्याकियाअपनाज़रादिखामुझको
क्याबनादियामुझकोयहतिरीमोहब्बतने
यहकहाँलेआईहैइकतिरीवफ़ामुझको
इसतरहतोउसकायेज़ख़्मभरनहींसकता
उससेेमिलनातोकहनाठीकसेभुलामुझको
  - Sagar Sahab Badayuni
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