ye vasl ki vehshat hai ibadat ki gha | ये वस्ल की वहशत है इबादत की घड़ी है

  - Sabir Amani
येवस्लकीवहशतहैइबादतकीघड़ीहै
नाराज़फ़रिश्तोंकीक़समटूटरहीहै
शो'ला-ए-पुर-जोशतवज्जोहमैंइधरहूँ
बद-मस्तइधरदेखजिधरआगलगीहै
सुनतेहैंख़ुदारूठगयाहैनहींसुनता
हालाँकिमिरेशहरकाहरशख़्सवलीहै
यारमुयस्सरकामज़ालेकेजुदाहो
इसमौसम-ए-गुलमेंतुझेजानेकीपड़ीहै
येआँखजिसेबोझसमझताहैमियाँतू
येबार-ए-हज़ीमतकोउठानेकीनफ़ीहै
मुझसेमिरेसय्यादनेवहशतसेकहाजा
लेआजसेतूमेरीमोहब्बतसेबरीहै
हरचीज़बदलदीहैमगरकुछनहींबदला
कहनेकोचमन-ज़ारकीहरशाख़नईहै
  - Sabir Amani
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