kaisi ma'ni ki qaba rishton ko pahnaai gaii | कैसी मअनी की क़बा रिश्तों को पहनाई गई

  - Sabir Adeeb
कैसीमअनीकीक़बारिश्तोंकोपहनाईगई
एकहीलम्हेमेंबरसोंकीशनासाईगई
हरदर-ओ-दीवारपरबचपनजवानीनक़्शथे
कबमिरेघरसेमिरेमाज़ीकीदाराईगई
इसक़दरऊँचीहुईदीवार-ए-नफ़रतहरतरफ़
आजहरइंसाँसेइंसाँकीपज़ीराईगई
हरनयादिनधूपकीकिरनोंसेतपकरआएहै
जिस्मसेठंडकगईआँखोंसेबीनाईगई
अबकहाँवोमस्तियाँसरगोशियाँगुल-रेज़ियाँ
दामन-ए-सहरासेजोआतीथीपुरवाईगई
वक़्तकीसौग़ातहैहमहैंहमतुमहोतुम
ज़ेहनसेसोचेंगईंहोंटोंसेसच्चाईगई
आजफिरहैहुक्मरानीतीरगीकीहरतरफ़
रौशनीइकपलको'साबिर'आईऔरआईगई
  - Sabir Adeeb
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