durust hai ki ye din raayegaan nahin guzre | दुरुस्त है कि ये दिन राएगाँ नहीं गुज़रे

  - Sabiha Saba
दुरुस्तहैकियेदिनराएगाँनहींगुज़रे
मगरसुकूँसेतोजान-ए-जाँनहींगुज़रे
मिज़ाज-ए-शहर-ए-जुनूँअबयेबरहमीकैसी
किसआगसेतिरेपीर-ओ-जवाँनहींगुज़रे
नज़रसेदूरसहीफिरभीकुश्तगान-ए-वफ़ा
वहाँसेकमतोयेसद
मेंयहाँनहींगुज़रे
मुरव्वतनवोमिरीबातपूछकरचुपहैं
वगरनाकबमिरेशिकवेगराँनहींगुज़रे
समुंदरोंकीहवादूरदूरसेगुज़र
वहाँकाहालसुनाहमजहाँनहींगुज़रे
हुजूम-ए-कारजहाँहोकिदश्त-ए-जाँकासुकूत
तिरेफ़िराक़केसद
मेंकहाँनहींगुज़रे
गुज़रगएवोजोजाँसेमगरयेहसरतहै
कोई'सबा'सेयेकहदेमियाँनहींगुज़रे
  - Sabiha Saba
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