ye sail-e-ashk mujhe guftugoo ki taab to de | ये सैल-ए-अश्क मुझे गुफ़्तुगू की ताब तो दे

  - Sabiha Saba
येसैल-ए-अश्कमुझेगुफ़्तुगूकीताबतोदे
जोयेकहूँकिवफ़ाकामिरीहिसाबतोदे
भरीबहार-रुतोंमेंभीख़ारलेआई
येइंतिज़ारकीटहनीकभीगुलाबतोदे
नहींनहींमैंवफ़ासेकिनारा-कशतोनहीं
वोदेरहाहैमुझेहिज्रकाअज़ाबतोदे
येख़ामुशीतोक़यामतकीजानलेवाहै
वोदिलदुखाएमगरबातकाजवाबतोदे
हरएकवाक़िआतारीख़-दारलिखजाऊँ
गएदिनोंकीमिरेहाथवोकिताबतोदे
येदेखकिसगुल-ए-तरपरनिगाहठहरीहै
देवोफूलमुझेदाद-ए-इंतिख़ाबतोदे
गुनाहगारसहीफिरभीमेरेहिस्सेका
तिरीतरफ़जोनिकलताहैवोसवाबतोदे
  - Sabiha Saba
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