tu nahin hai to mirii shaam akeli chup hai | तू नहीं है तो मिरी शाम अकेली चुप है

  - Sabiha Saba
तूनहींहैतोमिरीशामअकेलीचुपहै
यादमेंदिलकीयेवीरानहवेलीचुपहै
हरतरफ़थीबड़ीमहकारमेरेआँगनमें
अपनेफूलोंकेलिएमेरीचमेलीचुपहै
बोलतेहाथभीख़ामोशहुएबैठेहैं
इकमुक़द्दरकीतरहमेरीहथेलीचुपहै
भेदखुलताहीनहींकैसीउदासीछाई
बूझसकतानहींकोईवोपहेलीचुपहै
इतनाहँसतीथीकिआँसूनिकलआतेथे'सबा'
येनईबातबहारोंकीसहेलीचुपहै
  - Sabiha Saba
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