rishta-e-husn-o-mohabbat hai nihaayat naazuk | रिश्ता-ए-हुस्न-ओ-मोहब्बत है निहायत नाज़ुक

  - Sabiha Nasreen
रिश्ता-ए-हुस्न-ओ-मोहब्बतहैनिहायतनाज़ुक
क़स्र-ए-माशूक़कीहोतीहैइक़ामतनाज़ुक
पर्दा-ए-महमिल-ए-लैलासेहैमजनूँकोत्रास
रंगचेहरेकाउड़ाहोगईहालतनाज़ुक
दस्त-ए-नाज़ुकसेगिरापंजा-ए-मर्जांनागाह
दर-ए-मंशूरलिएआईहैसाअ'तनाज़ुक
मरहलाजश्न-ए-उरूसीकाबहर-तौररहा
बनगईऔरसबीहाकीसबाहतनाज़ुक
ज़ेबदेतीनहीं'नसरीं'कोयेदुनिया-दारी
किसतरहओहदा-बराहोवेज़ेहानतनाज़ुक
  - Sabiha Nasreen
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