pari sheeshe ke andar aa padi hai | परी शीशे के अंदर आ पड़ी है

  - Sabiha Nasreen
परीशीशेकेअंदरपड़ीहै
मय-ए-गुलनारकीवक़अतबड़ीहै
उठायासाग़र-ए-ज़र्रींतोसमझे
पस-ए-दीवारमाशूक़ाखड़ीहै
दियाजबकिख़िराज-ए-हुस्नहमने
येचोटीकिसलिएपीछेपड़ीहै
सफ़-ए-दंदाँहैदहन-ए-मुश्कबूमें
किसाँचेमोतियोंकीयेलड़ीहै
गुमाँहोताहैसुम्बुलकीलचकपर
किसीदस्त-ए-निगारींमेंछड़ीहै
ब-रब्त-ए-ख़ासहोतज़ईन-ए-ख़ातिर
येहुस्न-ओ-इश्क़कीनाज़ुककड़ीहै
हुईआसाइश-ए-दुनियातोहासिल
मगरआगेक़यामतकीघड़ीहै
छूटीदीदा-ए-उश्शाक़सेक्यूँ
येबरखाहैकिआँसूकीझड़ीहै
हुआनख़चीरआख़िरनज़्र-ए-ताइर
निगहकिसऔजपे'नसरीन'लड़ीहै
  - Sabiha Nasreen
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