lab-e-khamosh ko armaan-e-guftugoo hi sahi | लब-ए-ख़मोश को अरमान-ए-गुफ़्तुगू ही सही

  - Saba Naqvi
लब-ए-ख़मोशकोअरमान-ए-गुफ़्तुगूहीसही
जिगरमेंहौसला-ए-अर्ज़-ए-आरज़ूहीसही
असरक़ुबूलहैमुझकोबदलतीक़द्रोंका
रग-ए-हयातमेंअस्लाफ़कालहूहीसही
नमाज़-ए-इश्क़अदाहोरहीहैमक़्तलमें
येपुर-ख़ुलूसइबादतहैबे-वुज़ूहीसही
उसेभीख़ौफ़हैगुलशनमेंज़र्दमौसमका
वोसुर्ख़फूलकीमानिंदशो'ला-रूहीसही
जुनून-ए-इश्क़केलश्करसेहारजाएगी
सिपाह-ए-होश-ओ-ख़िरदलाखजंग-जूहीसही
वोमेरीतिश्नगी-ए-दिलबुझानहींसकता
खनकताजामछलकताहुआसुबूहीसही
मैंएकहर्फ़-ए-मलामतहूँउसकेदामनपर
वोमेरीपाकमोहब्बतकीआबरूहीसही
मिरीनिगाहकामरकज़नहींतोकुछभीनहीं
वोख़ुद-पसंदनिगाहोंमेंख़ूब-रूहीसही
'सबा'किशाइर-ए-ख़ुश-फ़िक्रहैमगरगुमनाम
हरएकउससेहैवाक़िफ़वोख़ुश-गुलूहीसही
  - Saba Naqvi
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