tum ne rasm-e-jafaa utha dii hai | तुम ने रस्म-ए-जफ़ा उठा दी है

  - Saba Akbarabadi
तुमनेरस्म-ए-जफ़ाउठादीहै
हमेंकिसजुर्मकीसज़ादीहै
शम-ए-उम्मीदक्यूँँजलादीहैइश्क़तारीकियोंकाआदीहै
आपनेख़ुदमुझेसदादीहै
यामिरीक़ुव्वत-ए-इरादीहै
हमतोमुद्दतकेमरगएहोते
मौतनेज़िंदगीबढ़ादीहै
अबदु'आपरभीए'तिमादनहीं
ना-मुरादीसीना-मुरादीहै
तुझसाबेदाद-गरकहाँहोगा
लब-ए-हर-ज़ख़्मनेदु'आदीहै
मुख़्तलिफ़हैंतसव्वुरात-ए-जमाल
येअक़ीदाभीइन्फ़िरादीहै
देखफ़ितरतकीबज़्म-आराई
ख़ाकपरचाँदनीबिछादीहै
येजोछोटीसीहैकलीसर-ए-शाख़
बाग़कीबादशाहज़ादीहै
लब-ए-तस्वीर-ए-दोस्तकुछतोबता
किसनेयेख़ामुशीसिखादीहै
'सबा'कीमिया-ए-ग़मकेलिए
ज़िंदगीख़ाकमेंमिलादीहै
  - Saba Akbarabadi
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