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Saarthi Baidyanath
ye bhi kuchh kam nahin har neend ko haasil hain aañkhen
ye bhi kuchh kam nahin har neend ko haasil hain aañkhen | ये भी कुछ कम नहीं हर नींद को हासिल हैं आँखें
- Saarthi Baidyanath
ये
भी
कुछ
कम
नहीं
हर
नींद
को
हासिल
हैं
आँखें
कि
अब
हर
ख़्वाब
को
आँखें
मिले
मुमकिन
नहीं
है
- Saarthi Baidyanath
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उतर
गया
है
चेहरा
तेरे
जाने
से
लॉक
नहीं
खुलता
है
अब
मोबाइल
का
Tanoj Dadhich
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उसी
के
चेहरे
पे
आँखें
हमारी
रह
जाएँ
किसी
को
इतना
भी
क्या
देखना
ज़रूरी
है
Jyoti Azad Khatri
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साक़ी
कुछ
आज
तुझ
को
ख़बर
है
बसंत
की
हर
सू
बहार
पेश-ए-नज़र
है
बसंत
की
Ufuq Lakhnavi
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मैं
हर
शख़्स
के
चेहरे
को
बस
इस
उम्मीद
से
तकता
हूँ
शायद
से
मुझको
दो
आँखें
तेरे
जैसी
दिख
जाएँ
Siddharth Saaz
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घूमता
रहता
है
हर
वक़्त
मेरी
आँखों
में
एक
चेहरा
जो
कई
साल
से
देखा
भी
नहीं
Riyaz Tariq
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लाखों
सद
में
ढेरों
ग़म
फिर
भी
नहीं
हैं
आँखें
नम
इक
मुद्दत
से
रोए
नहीं
क्या
पत्थर
के
हो
गए
हम
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Azm Shakri
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तू
जो
हर
रोज़
नए
हुस्न
पे
मर
जाता
है
तू
बताएगा
मुझे
इश्क़
है
क्या
जाने
दे
Ali Zaryoun
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कभी
ज़िन्दगी
से
यूँँ
न
चुराया
करो
नज़र
कि
मौजूद
भी
रहो
तो
न
आया
करो
नज़र
S M Afzal Imam
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अदाकार
के
कुछ
भी
बस
का
नहीं
है
मोहब्बत
है
ये
कोई
ड्रामा
नहीं
है
जिसे
तेरी
आँखें
बताती
हैं
रस्ता
वो
राही
कहीं
भी
पहुँचता
नहीं
है
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Zubair Ali Tabish
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तुझ
तक
आने
का
सफ़र
इतना
भी
आसाँ
तो
न
था
तूने
फेरी
है
नज़र
हम
सेे
जिस
आसानी
से
Mohit Dixit
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काम
आते
हैं
जो
हम
सबको
सँवरने
में
वो
आइने
अस्ल
में
बिखरे
हुए
हो
सकते
हैं
Saarthi Baidyanath
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ज़िन्दगी
तुझ
सेे
शिकायत
क्या
करूँँ
मुस्कुराने
की
है
आदत
क्या
करूँँ
चाँद
सा
महबूब
मेरे
पास
है
मैं
सितारों
से
मोहब्बत
क्या
करूँँ
आख़िरी
अंजाम
सबको
है
पता
रौशनी
तेरी
हिफ़ाज़त
क्या
करूँँ
जाएगी
अब
इस
ज़ईफ़ी
में
कहाँ
शा'इरी
की
ये
बुरी
लत
क्या
करूँँ
दफ़्न
कर
दूँ
या
जला
दूँ
बोलिए
'सारथी'
का
आख़िरी
ख़त
क्या
करूँँ
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Saarthi Baidyanath
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हर
बशर
साथ
में
खड़ा
तो
है
पर
कोई
पास
में
खड़ा
ही
नहीं
Saarthi Baidyanath
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वक़्त
का
एहतिराम
क्या
करना
ज़िन्दगी
तेरे
नाम
क्या
करना
जब
तुम
आओगे
घर
सजा
लेंगे
पहले
से
इंतिज़ाम
क्या
करना
यूँँ
भी
मैं
ठीक-ठाक
दिखता
हूँ
दोस्त
है
ताम-झाम
क्या
करना
दो
क़दम
पर
शराबख़ाना
है
रात
यूँँ
ही
तमाम
क्या
करना
'सारथी'
छोड़
दो
क़लमकारी
नौजवानी
में
धाम
क्या
करना
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Saarthi Baidyanath
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ज़माने
को
ग़लतफ़हमी
हुई
है
मैं
शायर
हूँ
कोई
मजनूँ
नहीं
हूँ
Saarthi Baidyanath
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