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Saarthi Baidyanath
waqt ka ehtiraam kya karna
waqt ka ehtiraam kya karna | वक़्त का एहतिराम क्या करना
- Saarthi Baidyanath
वक़्त
का
एहतिराम
क्या
करना
ज़िन्दगी
तेरे
नाम
क्या
करना
जब
तुम
आओगे
घर
सजा
लेंगे
पहले
से
इंतिज़ाम
क्या
करना
यूँँ
भी
मैं
ठीक-ठाक
दिखता
हूँ
दोस्त
है
ताम-झाम
क्या
करना
दो
क़दम
पर
शराबख़ाना
है
रात
यूँँ
ही
तमाम
क्या
करना
'सारथी'
छोड़
दो
क़लमकारी
नौजवानी
में
धाम
क्या
करना
- Saarthi Baidyanath
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रात
भर
उन
का
तसव्वुर
दिल
को
तड़पाता
रहा
एक
नक़्शा
सामने
आता
रहा
जाता
रहा
Akhtar Shirani
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ये
ज़ुल्फ़
अगर
खुल
के
बिखर
जाए
तो
अच्छा
इस
रात
की
तक़दीर
सँवर
जाए
तो
अच्छा
जिस
तरह
से
थोड़ी
सी
तेरे
साथ
कटी
है
बाक़ी
भी
उसी
तरह
गुज़र
जाए
तो
अच्छा
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Sahir Ludhianvi
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रात
यूँँ
दिल
में
तिरी
खोई
हुई
याद
आई
जैसे
वीराने
में
चुपके
से
बहार
आ
जाए
Faiz Ahmad Faiz
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ये
सर्द
रात
ये
आवारगी
ये
नींद
का
बोझ
हम
अपने
शहर
में
होते
तो
घर
चले
जाते
Ummeed Fazli
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अभी
हमको
मुनासिब
आप
होते
से
नहीं
लगते
ब–चश्म–ए–तर
मुख़ातिब
हैं
प
रोते
से
नहीं
लगते
वही
दर्या
बहुत
गहरा
वही
तैराक
हम
अच्छे
हुआ
है
दफ़्न
मोती
अब
कि
गोते
से
नहीं
लगते
ये
आई
रात
आँखों
को
चलो
खूँ–खूँ
किया
जाए
बदन
ये
सो
भी
जाए
आँख
सोते
से
नहीं
लगते
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Dhiraj Singh 'Tahammul'
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घर
में
भी
दिल
नहीं
लग
रहा
काम
पर
भी
नहीं
जा
रहा
जाने
क्या
ख़ौफ़
है
जो
तुझे
चूम
कर
भी
नहीं
जा
रहा
रात
के
तीन
बजने
को
है
यार
ये
कैसा
महबूब
है
जो
गले
भी
नहीं
लग
रहा
और
घर
भी
नहीं
जा
रहा
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Tehzeeb Hafi
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मैं
रोज़
रात
यही
सोच
कर
तो
सोता
हूँ
कि
कल
से
वक़्त
निकालूँगा
ज़िन्दगी
के
लिए
Swapnil Tiwari
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दिन
ढल
गया
और
रात
गुज़रने
की
आस
में
सूरज
नदी
में
डूब
गया,
हम
गिलास
में
Rahat Indori
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उसे
यूँँ
चेहरा-चेहरा
ढूँढता
हूँ
वो
जैसे
रात-दिन
सड़कों
पे
होगा
Shariq Kaifi
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खुलती
है
मेरी
नींद
हर
इक
रात
दो
बजे
इक
रात
दो
बजे
मुझे
छोड़ा
था
आपने
Tanoj Dadhich
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अगर
बिसात
पे
ही
खेल
ख़त्म
है
तो
फिर
मेरे
दिमाग़
में
क्यूँँ
खेल
चलता
रहता
है
Saarthi Baidyanath
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बोलता
है
बड़ी
बड़ी
बातें
भूल
जाए
घड़ी
घड़ी
बातें
कुछ
की
आदत
ही
ऐसी
होती
है
जो
उखाड़े
गड़ी
गड़ी
बातें
ओस
की
बूँद
की
तरह
हैं
कुछ
धूप
सी
कुछ
कड़ी
कड़ी
बातें
हर
किसी
को
पसंद
आती
हैं
मोतियों
सी
जड़ी
जड़ी
बातें
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Saarthi Baidyanath
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आदमी
अच्छा-बुरा
होता
है
बस
आदमी
छोटा-बड़ा
होता
नहीं
Saarthi Baidyanath
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ख़ुदस
कभी
जो
बात
करनी
होती
है
शुरुआत
से
शुरुआत
करनी
होती
है
Saarthi Baidyanath
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रात
में
चाँद-
सितारे
ही
भले
लगते
हैं
उसके
कश्कोल
में
सूरज
तो
नहीं
दे
सकते
Saarthi Baidyanath
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