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Saarthi Baidyanath
tujhe jeene nahin degi ye duniya
tujhe jeene nahin degi ye duniya | तुझे जीने नहीं देगी ये दुनिया
- Saarthi Baidyanath
तुझे
जीने
नहीं
देगी
ये
दुनिया
ये
दुनिया
भी
कहाँ
ख़ुद
जी
रही
है
- Saarthi Baidyanath
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दुनिया
की
फ़िक्र
छोड़,
न
यूँँ
अब
उदास
बैठ
ये
वक़्त
रब
की
देन
है,
अम्मी
के
पास
बैठ
Salman Zafar
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सगी
बहनों
का
जो
रिश्ता
रिश्ता
है
उर्दू
और
हिन्दी
में
कहीं
दुनिया
की
दो
ज़िंदा
ज़बानों
में
नहीं
मिलता
Munawwar Rana
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जहाँ
जो
था
वहीं
रहना
था
उस
को
मगर
ये
लोग
हिजरत
कर
रहे
हैं
Liaqat Jafri
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चलो
ऐ
हिंद
के
सैनिक
कि
लहराएँ
तिरंगा
हम
जिसे
दुनिया
नमन
करती
है
उस
पर्वत
की
चोटी
पर
ATUL SINGH
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जब
आ
जाती
है
दुनिया
घूम
फिर
कर
अपने
मरकज़
पर
तो
वापस
लौट
कर
गुज़रे
ज़माने
क्यूँँ
नहीं
आते
Ibrat Machlishahri
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हुआ
है
तुझ
से
बिछड़ने
के
बाद
ये
मालूम
कि
तू
नहीं
था
तेरे
साथ
एक
दुनिया
थी
Ahmad Faraz
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सिर्फ़
ज़िंदा
रहने
को
ज़िंदगी
नहीं
कहते
कुछ
ग़म-ए-मोहब्बत
हो
कुछ
ग़म-ए-जहाँ
यारो
Himayat Ali Shayar
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हम
क्या
करें
अगर
न
तिरी
आरज़ू
करें
दुनिया
में
और
भी
कोई
तेरे
सिवा
है
क्या
Hasrat Mohani
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जहाँ
इंसानियत
वहशत
के
हाथों
ज़ब्ह
होती
हो
जहाँ
तज़लील
है
जीना
वहाँ
बेहतर
है
मर
जाना
Gulzar Dehlvi
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तुम्हारे
साथ
था
तो
मैं
गम-ए-उल्फ़त
में
उलझा
था
तुम्हें
छोड़ा
तो
ये
जाना
कि
दुनिया
ख़ूब-सूरत
है
Nirbhay Nishchhal
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अलग
सब
सेे
तबीअत
है
करें
क्या
मुझे
बुत
से
मोहब्बत
है
करें
क्या
दु'आ
में
मौत
मेरी
मांगते
हैं
सितमगर
की
शरारत
है
करें
क्या
बदन
संदल
निग़ाहें
शबनमी
हैं
क़सम
से
वो
क़यामत
है
करें
क्या
मैं
आदत
शा'इरी
की
छोड़
देता
मगर
दिल
की
ज़रूरत
है
करें
क्या
कोई
भी
डुगडुगी
सुनकर
न
आया
मदारी
को
शिकायत
है
करें
क्या
सनम
ने
रख
लिया
है
मुझको
दिल
में
न
मरने
की
इजाज़त
है
करें
क्या
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Saarthi Baidyanath
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हर
बशर
साथ
में
खड़ा
तो
है
पर
कोई
पास
में
खड़ा
ही
नहीं
Saarthi Baidyanath
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वो
काश
आकर
पास
बैठे
दो
घड़ी
अल्लाह
मियाँ
कुछ
कर,
मुझे
बीमार
कर
Saarthi Baidyanath
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इक
नहीं
ये
सौ
दफ़ा
हर
बार
होना
चाहिए
तीर
गर
निकले
जिगर
के
पार
होना
चाहिए
Saarthi Baidyanath
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तराज़ू
कैसा
है
ये
न्याय
का
जो
ग़रीबों
की
तरफ़
झुकता
नहीं
है
Saarthi Baidyanath
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