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Saarthi Baidyanath
pahle ik baat to mukammal ho
pahle ik baat to mukammal ho | पहले इक बात तो मुकम्मल हो
- Saarthi Baidyanath
पहले
इक
बात
तो
मुकम्मल
हो
बाद
में
दूसरी
भी
कर
लेंगे
- Saarthi Baidyanath
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हर
एक
चौखट
खुली
हुई
थी
हर
इक
दरीचा
खुला
हुआ
था
कि
उसकी
आमद
पे
दर
यहाँ
तक
कि
बेघरों
का
खुला
हुआ
था
ये
तेरी
हम्म
ने
हमें
ही
उलझन
में
डाल
रक्खा
है
वरना
हम
पर
तमाम
साइंस
के
फ़लसफ़ों
का
हर
एक
चिट्ठा
खुला
हुआ
था
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Saad Ahmad
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मसअला
ख़त्म
हुआ
चाहता
है
दिल
बस
अब
ज़ख़्म
नया
चाहता
है
Shakeel Jamali
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इसी
लिए
तो
यहाँ
अब
भी
अजनबी
हूँ
मैं
तमाम
लोग
फ़रिश्ते
हैं
आदमी
हूँ
मैं
Bashir Badr
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कीजे
इज़हार-ए-मोहब्बत
चाहे
जो
अंजाम
हो
ज़िंदगी
में
ज़िंदगी
जैसा
कोई
तो
काम
हो
Priyamvada ilhan
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सुलग
रहे
थे
शजर
दिल
तमाम
भँवरों
के
दिल
अपना
वार
रहा
था
कोई
रुख़-ए-गुल
पर
बहुत
मलाल
हुआ
देखकर
गुलिस्ताँ
में
तमाचा
मार
रहा
था
कोई
रुख़-ए-गुल
पर
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Shajar Abbas
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दिल
के
तमाम
ज़ख़्म
तेरी
हाँ
से
भर
गए
जितने
कठिन
थे
रास्ते
वो
सब
गुज़र
गए
Kumar Vishwas
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यही
अंजाम
अक्सर
हम
ने
देखा
है
मोहब्बत
का
कहीं
राधा
तरसती
है
कहीं
कान्हा
तरसता
है
Virendra Khare Akela
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फ़र्क़
इतना
है
कि
तू
पर्दे
में
और
मैं
बे-हिजाब
वर्ना
मैं
अक्स-ए-मुकम्मल
हूँ
तिरी
तस्वीर
का
Asad Bhopali
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तमाम
जिस्म
को
आँखें
बना
के
राह
तको
तमाम
खेल
मुहब्बत
में
इंतिज़ार
का
है
Munawwar Rana
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मैं
तमाम
दिन
का
थका
हुआ
तू
तमाम
शब
का
जगा
हुआ
ज़रा
ठहर
जा
इसी
मोड़
पर
तेरे
साथ
शाम
गुज़ार
लूँ
Bashir Badr
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बहुत
चर्चा
हमारा
हो
रहा
है
इशारों
में
इशारा
हो
रहा
है
लकीरें
हाथ
की
बेकार
हैं
सब
समझिये
बस
गुज़ारा
हो
रहा
है
न
जाने
रूह
पे
गुज़री
है
क्या
क्या
बदन
का
ख़ून
खारा
हो
रहा
है
बड़ी
हैरत
में
हैं
तारे
गगन
के
कोई
जुगनू
सितारा
हो
रहा
है
तुम
अपनी
धड़कनों
को
साधे
रखना
तुम्हारा
दिल
हमारा
हो
रहा
है
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Saarthi Baidyanath
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लोरियाँ
माँ
ने
सुनाई
और
फिर
मेरे
सपनों
में
उजाला
हो
गया
Saarthi Baidyanath
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अगर
बारहखड़ी
पर
रुक
गया
मैं
तो
यह
जीवन
न
कविता
बन
सकेगी
Saarthi Baidyanath
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चाँद
सा
महबूब
मेरे
पास
है
मैं
सितारों
से
मुहब्बत
क्या
करूँँ
Saarthi Baidyanath
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किसे
जन्नत
मिलेगी
या
किसे
दोज़ख़
मिलेगा
इसे
भी
तय
ज़मीं
पर
रहने
वाले
कर
रहे
हैं
Saarthi Baidyanath
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